अब ना पाने की
ख्वाइश
ना रोने की ज़रुरत
मुझको
ना ग़मों की दहशत
ना मंजिल की तलाश
मुझको
अब तसल्ली मुकाम
मेरा
खुश हूँ उसमें
जो मिला,ना मिला
निरंतर मुझको
25-11-2011
1818-83-11-11
निरंतर कुछ सोचता रहे,कुछ करता रहे,कलम के जरिए बात अपने कहता रहे.... (सर्वाधिकार सुरक्षित) ,किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का कोई प्रयोजन नहीं है,फिर भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )