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Thursday, April 7, 2011

पश्चाताप

कई
पौधे बगिया में थे,
कुछ में कलियाँ थी
,
खिलने की बाट
जोह
रहीं थी
कई फूल खिले थे

कुछ अध्
खिले,
कुछ शवाब पर थे
,
कुछ जीवन के

अंतिम पड़ाव पर थे
,
भौरें ने
बगिया में प्रवेश किया
घूम कर
बगिया का जायजा लिया
बूढ़े फूलों को दूर से देखा

शवाब पर आये
फूलों की और रुख किया
गुंजन से उन्हें लुभाने लगा

एक फूल
गुंजन पर मोहित हुआ
भौरें को निमंत्रण दिया

फूल गर्व से भर गया

भौरें ने
केवल उस को चुना
खुद को दूसरों से
बेहतर समझने लगा
कुटिल भौरें ने
रसस्वादन फूल का किया
वासना
को संतुष्ट किया
फूल को रोते छोड़ गया

फूल अब पछता रहा था

गलती का
अहसास उसे हो गया
भौरों के
मीठे गुंजन के प्रलोभन में
 फसने पर
गर्व करने वाला
निरंतर
पश्चाताप में डूबा था