शैतानी फितरत
कामयाब हो गयी है
इंसान के
दिल-ओ-दिमाग पर
हावी हो गयी है
शहर की आबो हवा
बदल गयी है
फिजा धूल मिट्टी से
भर गयी है
चिड़ियाएं मेहमान
हो गयी हैं
सडकें गाड़ियों से
पट गयीं हैं
पेड़ों की हरयाली
कम हो गयी है
ताज़ी हवा
कहानी बन गयी है
ज़मीन सोने से भी
महंगी हो गयी है
जीना मजबूरी हो
गयी है
शहर की आबो हवा
बदल गयी है
18-02-2012
187-98-02-12
जन्म के
समय,माँ को खोया
माँ बाप का प्यार
कभी नसीब ना हुआ
सदा प्रताड़ित होता रहा
चुप चाप सहता रहा
प्रतिशोध
मन में पालता रहा
मेहनत,और जज्बे से
आगे बढ़ता रहा
जिस कम्पनी में
सौतेला भाई
काम करता था
उस में सर्वोच्च
अफसर बन गया
प्रतिशोध जागा
सौतेले भाई को
नौकरी से
निकालना
तय कर लिया
हस्ताक्षर
करने ही वाला था
एक परिचित ने
कमरे में प्रवेश किया
अपने पुत्र की
नौकरी के लिए
निवेदन किया
उसे पता था,
परिचित का पुत्र
निरंतर उन से
दुर्व्यवहार करता था
कभी गाली देता
कभी हाथ उठाता
परिचित की बात सुन
वो हतप्रभ रह गया
परिचित से पूंछा
राक्षस पुत्र के लिए
नौकरी
क्यों मांग रहे हो ?
जवाब मिला,
वो कुछ भी करे
अगर मैं उसकी
बराबरी करूंगा
तो उस में और मेरे में
क्या फर्क रह जाएगा
परमात्मा पर विश्वाश है
वक़्त के साथ
वह भी बदल जाएगा
यह सुन,
उसने भी विचार किया
प्रतिशोध त्याग दिया
सौतेले भाई को
नौकरी से निकालने का
निश्चय छोड़ दिया
11-04-2011
651-84-04-11