तेज़ धूप में
उसका चेहरा
कुम्हला रहा था
पसीना किसी
झरने के पानी
सा बह रहा था
देख कर कुछ ऐसा
महसूस हुआ
जैसे किसी ने
बेरहमी से
बर्फ के टुकड़े को
तेज़ आंच पर
रख दिया
05-06-2012
571-21-06-12
निरंतर कुछ सोचता रहे,कुछ करता रहे,कलम के जरिए बात अपने कहता रहे.... (सर्वाधिकार सुरक्षित) ,किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का कोई प्रयोजन नहीं है,फिर भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )