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Tuesday, February 21, 2012

तुम्हारी सुगंध


घर के बगीचे में
जब चमेली की बेल
फूलों से लदती है
अपने को
 रोक नहीं पाता
उसके पास जाकर 
खडा हो जाता हूँ
घंटों उनकी सुगंध
सूंघता हूँ तो
मदमस्त हो जाता हूँ
मुझे महसूस होता है
तुम मुझसे से दूर नहीं हो
तुम्हारी चोटी में
बंधी हुयी
चमेली की वेणी 
सदा ऐसी ही खुशबू
बिखेरती थी
मुझे तुम्हारी
कमी तो खलती है
पर सोचता हूँ
तुम्हारी पसंद को
अपनी पसंद बनाने से
तुम्हारी आत्मा को
सुकून मिलता होगा 
तुम दूर आकाश से
चमेली के फूल के प्रति
मेरी आसक्ति देख कर
खुश होती होगी
मेरी उम्मीद बढ़ती है
शायद तुम कभी
चमेली का
फूल बन कर ही 
बगीचे में खिल जाओ
चमेली की सुगंध में
तुम्हारी सुगंध भी 
घुलमिल जाए
मुझे फिर से
मदमस्त कर दे
21-02-2012
214-125-02-12