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Sunday, November 13, 2011

मेरा मौन


उनके
अप्रतिम सौन्दर्य से
अभिभूत था
उनसे मिलने से पहले
मन में
सैकड़ों सपने संजोता
क्या क्या कहना है
मष्तिष्क में
सूची बनाता
मिलने पर जुबान को
लकवा मार जाता
मुंह से एक शब्द नहीं
निकलता
उनका निश्छल सरल
व्यवहार
निरंतर मेरे उनके
बीच में आता
मन का मनोरथ
मन में रहता
प्यार ह्रदय में दबा
रहता
मुझे एक शब्द भी
कहने ना देता
केवल मेरा मौन मेरा
साथ देता
12-11-2011
1785-56-11-11