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Tuesday, May 15, 2012

सीधी सादी लडकी

उस सीधी
सादी लडकी को
जिसके चेहरे पर
कभी सौन्दर्य प्रसाधन की
छाया भी नहीं देखी
जो सदा साधारण से
कपड़ों में दिखती थी
आज मेरे घर के
दरवाज़े पर
सौन्दर्य की प्रतिमूर्ती
बन कर खडी थी
किसी परी से लग रही थी  
मैंने जिज्ञासावश
पूछ लिया
इतना बन ठन कर
आयी हो
आज कोई
विशेष बात है क्या
उसने मुस्काराते हुए
सर झुकाया
फिर शर्माते हुए
धीरे से बोली
आज जीवन में
अवर्णनीय खुशी का
दिन है
बरसों से दबी इच्छा
आज पूरी होगी
आप से पहली बार
अकेले में
मुलाक़ात जो होगी
14-05-2012
520-40-05-12

Monday, April 30, 2012

ख़्वाबों में


कल रात जब
उससे मुलाक़ात हुयी
मुझ से रहा ना गया
उससे पूछ ही लिया
कब मिलोगी मुझसे
हकीकत में
रुआंसा चेहरा लिए
वो कहने लगी
तुम खुशकिस्मत हो
खवाबों में
मुझसे मिल लेते हो
मेरे बदकिस्मती देखो
मोहब्बत करती हूँ
जिससे
वो मिला नहीं
अब तक कहीं भी
मुझसे
27-04-2012
479-60-04-12

Monday, February 27, 2012

मदहोशी

बगीचे में
 अकेली बैठी थी
आँखों में बेचैनी
चेहरे पर
उम्मीद की लकीरें
दिल की धड़कन
तेज़ हो रही थी
ख्यालों में 
डूबी हुयी थी
निगाहें
आसमान की तरफ
देख रही थी 
शायद खुदा से दुआ
कर रही थी
बहुत 
इम्तहान ले लिया
कब तक तडपाओगे
अब तो उसे भेज दे
उसे पता नहीं था
वो भी ख्यालों में डूबा
बगीचे के दरवाज़े पर 
उसकी ख़ूबसूरती देख
मदहोश हो गया था
खडा का 
खडा रह गया
आज उनकी पहली
मुलाक़ात होनी थी
27-02-2012
257-168-02-12

Thursday, January 19, 2012

बस इतना सा बता दो


उनसे 
मुलाक़ात हुयी
कई मुद्दों पर गुफ्तगू हुयी
कुछ दिल को अच्छी लगी
कुछ मन को भायी
जाते जाते
मैंने पूछ लिया उनसे
क्या सोचते हैं वो
हमारे बारे में
उन्होंने जवाब नहीं दिया
बस मुस्कारा कर रह गए
फिर नज़रें  झुका कर
धीरे से बोले
कब फिर मिलोगे
बस इतना सा बता दो
19-01-2012
64-64-01-12

Monday, October 3, 2011

जब भी कोई नया मिलता

जब भी
कोई नया मिलता
बहुत कम दिल
को भाता
जो भी दिल को भाता
मन को भी लुभाता
अपनेपन का अहसास
कराता
जहन में अजीब सा
ज़लज़ला मचता
फिर मिलने की चाहत
बढाता
दिल से दिल
मन से मन मिले
ना भूले कभी
ना बिछड़े कभी
मन निरंतर नज़दीकी
चाहता
परमात्मा से दुआ
उसकी खुशी और
सलामती की करता
रोज़ उसका इंतज़ार
रहता  
01-10-2011
1595-04-10-11

पहली बार मिले

पहली बार मिले
रंग बिरंगे
सपने उड़ान भरने लगे
मन के सूने आकाश में
परिंदे फडफडाने लगे
ह्रदय में प्रेम संगीत के
नए सुर सजने लगे
संबंधों को विचारों से
आगे बढाने लगे
हवाई किले बनाने से
पहले
उनसे भी तो पूछ लो
वो क्या चाहते हैं ?
निरंतर ,मुस्काराने को
प्रेम क्यों समझते हो
01-10-2011
1593-02-10-11

Saturday, October 1, 2011

पहली बार मिले

पहली बार मिले
रंग बिरंगे
सपने उड़ान भरने लगे
मन के सूने आकाश में
परिंदे फडफडाने लगे
ह्रदय में प्रेम संगीत के
नए सुर सजने लगे
संबंधों को विचारों से
आगे बढाने लगे
हवाई किले बनाने से
पहले
उनसे भी तो पूछ लो
वो क्या चाहते हैं ?
निरंतर ,मुस्काराने को
प्रेम क्यों समझते हो
01-10-2011
1593-02-10-11