हकीकत ही तो है
अब किसी की
सूरत नहीं भाती
किसी की आवाज़
अच्छी नहीं लगती
किसी की आँखों में
डूबने का
मन नहीं करता
किसी के नाम पर
दिल नहीं धड़कता
कोई चाल
मतवाली नहीं लगती
किसी का
ख्याल नहीं आता
कोई मेरे ख़्वाबों में
नहीं आता
क्यों की मुझे उससे
इश्क हो गया है
सिवाय उसके
कुछ और नहीं
सूझता
19-02-2012
201-112-02-12
उन्हें देखना
क़यामत ढा गया
इश्क अब रोजगार
बन गया
सुबह-ओ-शाम का
काम हो गया
भूख ख़त्म हो गयी
उनका दीदार प्यास
हो गयी
जीना दुश्वार हो गया
उन्हें पाना अब मकसद
हो गया
निरंतर इंतज़ार आदत
बन गया
जूनून की हद तक
इश्क सर पर सवार
हो गया
26-07-2011
1237-117-07-11
शराब नहीं पीता
फिर भी हर वक़्त
नशे में रहता
,उनके इश्क में
बहकता
खुद को भूलता
सिर्फ उनका
महताब सा चेहरा
जहन में रहता
दिल निरंतर अब
उसी से बहलता
02-07-2011
1125-09-07-11
(महताब=Moon )
दिल का क्या
वो तो मचलेगा
मिलने की चाहत
करेगा
तुम चाहो तो
इल्तजा सुन लो
ना चाहो ठुकरा दो
बीमार-ऐ-इश्क हूँ
उम्मीद में जीता
रहूँगा
01-07-2011
1119-03-07-11
इश्क बड़ा ज़ालिम
क़यामत बहुत ढहाए ?
ना हंसने, रोने दे
ना उठने ,बैठने दे
हर हाल में नींद उडाये
ख़्वाबों की दुनिया में
गोते लगवाए
चेहरा हाल-ऐ-दिल
सारे जहाँ को बताये
आशिक को
इंतज़ार माशूक का
बेचैनी को दोस्त बनाए
निरंतर ज़िन्दगी और
मौत के बीच झुलाए
11-06-2011
1032-59-06-11