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Tuesday, December 13, 2011

तेरी बराबरी कैसे करूँ?


निरंतर सोचता हूँ
दर्द-ऐ-दिल
दुनिया को सुनाऊँ
बीते लम्हों  का
अफ़साना बताऊँ
जुबां खोलते हुए
डरता हूँ
ज़िक्र तेरा भी करना
होगा
तेरी बेवफाई का
आलम बताना पडेगा
तुझे बदनाम होना
पडेगा
उसे कैसे छुपाऊँ?
अधूरी हसरतों से
नकाब कैसे हटाऊँ?
बेफफायी का बदला
बेवफाई से क्यों दूं  ?
दिल से चाहा है तुझे
तेरी बराबरी कैसे करूँ?
इस लिए खामोश
रहता हूँ
चुपचाप सहता हूँ
14-12-2011
1860-28-12

Friday, November 25, 2011

क्षणिकाएं -7


बराबरी
ऊंचे आसन पर
बैठ कर
धर्म गुरु प्रवचन
देते हैं
सब से बराबरी का
व्यवहार करो
*****
फुर्सत
हर आदमी
हंसना चाहता है
मगर रोने से
फुर्सत नहीं मिलती
*****
मेरा दुःख
हर आदमी सोचता
मेरा दुःख सबसे
ज्यादा
****
गति
घायल की
गति घायल जाने
जो मर गया
उसकी
गति कौन जाने ?
****
डाक्टर
इंतज़ार बीमार का
करता
इलाज बीमारी का
करता
****
भूख
भूख इंसान की
सबसे बड़ी बीमारी
अगर भूख नहीं होती
कोई भूखा नहीं रहता
झगडा फसाद कभी
नहीं होता
हर शख्श प्रेम से
रहता
(पेट,धन,पद,बल,काम,
ख्याती और की भूख)
****
ज़ल्दी
यात्रियों को
मंजिल पर
पहुँचने की ज़ल्दी
पहुँच गए तो घर
लौटने की ज़ल्दी
*****
जिसे मिल जाता
जिसे मिल जाता
वो खुश होता
मौत के बारे में ऐसा
कोई ना कहता
****
इतिहास
इतिहास
भविष्य के लिए
आगाह करता है
विडंबना है
कोई ध्यान नहीं
देता
****
ख्याति
इंसान की ख्याति
उसके पहुँचने से 
पहले पहुँचती
उसके जाने के
 बाद भी रहती
****
हाइकु
क्यों लिखू हाइकु
जब क्षणिका मेरे पास
क्यों लूं उधार
जब मेरी अपनी
मेरे साथ
25-11-2011
1817-82-11-11