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Sunday, September 2, 2012

आज फुर्सत में भी फुर्सत नहीं उन्हें हमारे लिए



आज फुर्सत में भी
फुर्सत नहीं उन्हें हमारे लिए
फिर भी कहते हैं दिल से
चाहते हमें
क्या सच ? क्या झूठ ?
या तो खुदा जानता
या उनका ज़मीर जानता
हमारा तो दिल बस
उनके लिए ही धडकता
हर सांस पर
उनका ही नाम होता
ना मिले चाहे फुर्सत उन्हें
जीने के लिए
उनकी याद ही काफी है
02-09-2012
709-05-09-12


Friday, November 25, 2011

क्षणिकाएं -7


बराबरी
ऊंचे आसन पर
बैठ कर
धर्म गुरु प्रवचन
देते हैं
सब से बराबरी का
व्यवहार करो
*****
फुर्सत
हर आदमी
हंसना चाहता है
मगर रोने से
फुर्सत नहीं मिलती
*****
मेरा दुःख
हर आदमी सोचता
मेरा दुःख सबसे
ज्यादा
****
गति
घायल की
गति घायल जाने
जो मर गया
उसकी
गति कौन जाने ?
****
डाक्टर
इंतज़ार बीमार का
करता
इलाज बीमारी का
करता
****
भूख
भूख इंसान की
सबसे बड़ी बीमारी
अगर भूख नहीं होती
कोई भूखा नहीं रहता
झगडा फसाद कभी
नहीं होता
हर शख्श प्रेम से
रहता
(पेट,धन,पद,बल,काम,
ख्याती और की भूख)
****
ज़ल्दी
यात्रियों को
मंजिल पर
पहुँचने की ज़ल्दी
पहुँच गए तो घर
लौटने की ज़ल्दी
*****
जिसे मिल जाता
जिसे मिल जाता
वो खुश होता
मौत के बारे में ऐसा
कोई ना कहता
****
इतिहास
इतिहास
भविष्य के लिए
आगाह करता है
विडंबना है
कोई ध्यान नहीं
देता
****
ख्याति
इंसान की ख्याति
उसके पहुँचने से 
पहले पहुँचती
उसके जाने के
 बाद भी रहती
****
हाइकु
क्यों लिखू हाइकु
जब क्षणिका मेरे पास
क्यों लूं उधार
जब मेरी अपनी
मेरे साथ
25-11-2011
1817-82-11-11

Saturday, November 19, 2011

ख्वाईशें दम तोडती रही


जब भी मिलते
निरंतर कहते हम से
किसी दिन
फुरसत में बात करेंगे
उनकी
फ़ुरसत के इंतज़ार में
उम्र बीत गयी
ना उन्हें फुरसत मिली
ना हमारी हसरतें
पूरी हुयी
ख्वाईशें
दम तोडती रही
दिल की बात
दिल में रह गयी
19-11-2011
1799-70-11-11