Showing posts with label बेदिल. Show all posts
Showing posts with label बेदिल. Show all posts

Wednesday, April 18, 2012

हमने समझा था ,हमें सुकून मिल गया


हमें 
सुकून मिल गया
पता नहीं चला
कब ज़ख्म बढ़ गया
जिसे समझा था
 सहारा
वो ही  हाथ में
खंज़र लिए निकला
हँसते हँसते कर दिया
वार पीठ पर 
जिसे चाहा था 
दिल से 
वही कातिल निकला 
18-04-2012
458-39-04-12

Wednesday, February 22, 2012

तुम याद रखो ना रखो




आँखों से 
दूर हो भी जाओगे
तो दिल से नहीं 
उतरोगे
इतने खुदगर्ज़ नहीं
भूल जायेंगे तुम्हें
हम इतने
बदतमीज तो नहीं
तहजीब ही भूल जाएँ
चाहा है तुम्हें दिल से
चाहते रहेंगे
इतने बेदिल भी नहीं
खुद अपने दिल से
खेलेंगे
तुम याद रखो 
ना रखो
वो अलग बात है
22-02-2012
217-128-02-12

Sunday, January 15, 2012

ये चेहरा आज कुम्हलाया हुआ क्यूं है

ये चेहरा आज
कुम्हलाया हुआ क्यूं है
दिल किसने दुखाया
उसका पता क्या है
जा कर पूछूंगा उससे
उसके वहशीपन की
वजह क्या है
क्यूं उसे
खूबसूरत चेहरे
नहीं भाते
क्यूं इमानदारी से
जीने वाले उसे बुरे
लगते
क्यूं इतना बेदिल है
दिलदार उसे खारे
लगते
15-01-2012
44-44-01-12

Tuesday, December 13, 2011

कल फिर से हँसेंगे हम


रास्ते सभी बंद हो गए
तो क्या
हमारा ज़ज्बा हमारे साथ है
लोग बेदिल हो गए
तो क्या
हमारा दिल हमारे साथ है
उठा दिया लोगों ने महफ़िल से 
तो क्या 
नयी महफ़िल बनायेंगे हम
छोड़ गए अपने साथ हमारा
तो क्या
परायों को अपना बनायेंगे हम
आज अश्क बह रहे आँखों से
तो क्या
कल फिर से हँसेंगे हम
हिम्मत से लड़ते रहेंगे
मोहब्बत से जीना ना
छोड़ेंगे हम
13-12-2011
1859-27-12

Thursday, November 24, 2011

कितना भी दूर रहो नज़रों से


कितना भी
दूर रहो नज़रों से
हमें दिल के पास
पाओगे
हम कद्रदां तुम्हारे
इतने बेदिल नहीं
रुसवा
हो जाएँ  तुमसे
निरंतर तुम्हें मंजिल
समझा
तुम्हें पाए बिना कैसे
रास्ते से भटक जाए
24-11-2011
1816-87-11-11

Friday, November 11, 2011

गर तूँ बेदिल होता


निरंतर
तेरा ये हाल
ना होता
गर तूँ बेदिल होता
तेरा दिल किसी को
देख कर ना धड़कता
ना किसी पर जाँ
निसार करता
ना बेकरार रहता
ना यादों में खोता
ना रातों को जागता
ना दिल से दिल
लगाता
ना बार बार टूटता
बिना मोहब्बत करे
जीता रहता
ज़िन्दगी का मकसद
भूल जाता
खुशकिस्मत समझ
खुद को
तूँ मोहब्बत की कीमत
समझता
11-11-2011
1777-48-11-11