उनके गम
हम से देखे ना जाते
उनके आँसू निरंतर
दिल में अंगारे जलाते
उनके साथ हम भी
जलते
ये बात जुदा है
अब रिश्ते नहीं उनसे
मुद्दत हो गयी
उन्हें हमसे रुसवा हुए
दिल हमारा अब भी
उनका
हम इतने बेदिल नहीं
दिल एक बार दे कर
फिर वापस ले लें
अब भी उनको
दिल से चाहते
03-12-2011
1837-102-11-11
कितना भी
दूर रहो नज़रों से
हमें दिल के पास
पाओगे
हम कद्रदां तुम्हारे
इतने बेदिल नहीं
रुसवा
हो जाएँ तुमसे
निरंतर तुम्हें मंजिल
समझा
तुम्हें पाए बिना कैसे
रास्ते से भटक जाए
24-11-2011
1816-87-11-11
हम
राहगुजर तो नहीं
निगाहें उठा कर भी
ना देखो हमको
धूल का गुबार भी नहीं
मुंह छुपाओ हमसे
ये बात जुदा है
तुम रुसवा हुए हमसे
दूर हो गए हमारी
ज़िन्दगी से
कम से कम इंसान तो
समझो हमको
देख कर मुंह ना
फिराओ
इंसान की तरह पेश
आओ हमसे
17-11-2011
1795-66-11-11
उसे गले लगाता रहा
दिल उसी को देता रहा
हर लम्हा सहारा दिया
मंजिल उसे मान लिया
उसेके ग़मों को निरंतर
खुद का समझता रहा
खुद चुपचाप सहता रहा
उसे हमेशा हँसाता रहा
किस बात से रुसवा हुए
पता भी ना चलने दिया
हसरतों की किश्ती को
मंझधार में छोड़ दिया
मरने से पहले ही कई
बार दोजख देख लिया
19-09-2011
1524-95-09-11