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Saturday, December 3, 2011

उनके गम हम से देखे ना जाते


उनके गम
हम से देखे ना जाते
उनके आँसू निरंतर
दिल में अंगारे जलाते
उनके साथ हम भी
जलते
ये बात जुदा है
अब रिश्ते नहीं उनसे
मुद्दत हो गयी
उन्हें हमसे रुसवा हुए
दिल हमारा अब भी
उनका
हम इतने बेदिल नहीं
दिल एक बार दे कर
फिर वापस ले लें
अब भी उनको
दिल से चाहते
03-12-2011
1837-102-11-11

Thursday, November 24, 2011

कितना भी दूर रहो नज़रों से


कितना भी
दूर रहो नज़रों से
हमें दिल के पास
पाओगे
हम कद्रदां तुम्हारे
इतने बेदिल नहीं
रुसवा
हो जाएँ  तुमसे
निरंतर तुम्हें मंजिल
समझा
तुम्हें पाए बिना कैसे
रास्ते से भटक जाए
24-11-2011
1816-87-11-11

Thursday, November 17, 2011

हम राहगुजर तो नहीं


हम
राहगुजर तो नहीं
निगाहें उठा कर भी
ना देखो हमको
धूल का गुबार भी नहीं
मुंह छुपाओ हमसे
ये बात जुदा है
तुम रुसवा हुए हमसे
दूर हो गए हमारी 
ज़िन्दगी से
कम से कम इंसान तो
समझो हमको
देख कर मुंह ना
फिराओ
इंसान की तरह पेश
आओ हमसे
17-11-2011
1795-66-11-11

Sunday, September 18, 2011

जो भी हँस के मिला,उसे गले लगाता रहा

उसे गले लगाता रहा
दिल उसी को देता रहा 
हर लम्हा सहारा दिया
मंजिल उसे मान  लिया
उसेके ग़मों को निरंतर 
खुद का समझता रहा
खुद चुपचाप सहता रहा
उसे हमेशा हँसाता रहा
किस बात से  रुसवा हुए
पता भी ना चलने दिया
हसरतों की किश्ती  को
मंझधार में छोड़ दिया
मरने से पहले ही कई
बार दोजख देख लिया
19-09-2011
1524-95-09-11