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Tuesday, May 15, 2012

खून जब बन जाता है पानी

बन जाता है पानी
मर्यादाएं
हो जाती हैं ध्वस्त
संतान
निकम्मी हो जाती
प्रताड़ित
करती माँ बाप को
रोती है धरती
रोता है आकाश
रोते हैं माँ बाप
कोसते हैं किस्मत को
क्यों जन्म दिया
ऐसी संतान को
निसंतान होने का दुःख
इतना भीषण तो
नहीं होता
खुद का खून जहर
बन कर
पल पल जान तो
नहीं लेता
14-05-2012
521-41-05-12