हमारी चाहत की
इन्तहा ही कहिये
वो रकीब से अकेले
में
गुफ्तगू करते रहे
कहीं बदनाम ना
हो जाएँ
कोई देख ना ले
दोनों को
फ़िक्र में हम परेशां
होते रहे
उनके घर के बाहर
चहल कदमी करते रहे
28-05-2012
541-61-05-12
निरंतर कुछ सोचता रहे,कुछ करता रहे,कलम के जरिए बात अपने कहता रहे.... (सर्वाधिकार सुरक्षित) ,किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का कोई प्रयोजन नहीं है,फिर भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )