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Sunday, November 6, 2011

ना जाने क्यूं उन्हें हमारी याद नहीं आती


ना जाने क्यूं उन्हें
हमारी याद नहीं आती
कैसे इतना भी
कोई भूलता किसी को
हमें एक हिचकी भी
नहीं आती
चाहत की सारी बातें
 ना जाने
कहाँ गुम हो जाती
एक तिनके सी
हवा में उड़ जाती
यहाँ निरंतर रातों की
नींद हराम होती
वहाँ बेफिक्री से
ज़िन्दगी जी जाती
ना जाने क्यूं उन्हें
हमारी याद नहीं आती
06-11-2011
1747-16-11-11

Sunday, July 31, 2011

जब याद करूँ हिचकी ले लिया करो

मुझे मेरे हाल पर

छोड़ दो

बस खतों का जवाब

दे दिया करो

ज़ख्मों पर मरहम

ना लगाओ

देख कर मुस्करा

दिया करो

रिश्ता चाहे ना रखो

मेरे नाम पर आहें

भर लिया करो

मुलाक़ात चाहे ना करो

बस ख़्वाबों में दिख

जाया करो

नज्मों में ज़िक्र चाहे

ना करो

मेरी नज्में निरंतर

पढ़ लिया करो

चाहो याद ना करो

जब याद करूँ

हिचकी ले लिया करो

31-07-2011

1275-159-07-11