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Saturday, February 11, 2012

इतनी ज़ल्दी कैसे भूल जाता है कोई

इतनी ज़ल्दी कैसे
भूल जाता है कोई
देख कर भी अनदेखा
करता है कोई
उम्मीदों के सपने
दिखाता है कोई
दिल लगा कर फिर
तोड़ता है कोई
ये कौन सा दस्तूर
निभाता है कोई
पुचकार कर फिर
जिबह करता है कोई
सारी हसरतें धूल में
मिलाता है कोई
मोहब्बत को बदनाम
करता है कोई
इतनी ज़ल्दी कैसे
भूल जाता है कोई
11-02-2012
150-61-02-12

Sunday, November 6, 2011

टूटे हुए दिल को क्यूं और तोड़ते हो तुम?


चेहरे को देख
हाल-ऐ-दिल
जान लेते हो तुम
फिर क्यूं 
सताते हो तुम?
देख कर क्यूं
अनदेखा करते हो तुम?
ज़ख्मों में निरंतर नश्तर
 चुभाते हो तुम
टूटे हुए दिल को
क्यूं और तोड़ते हो तुम?
माना कि जुदा हो गए
हमसे तुम
साथ गुजारे लम्हों के
खातिर ही सही
कम से कम नज़रें तो
मिला लिया करो
हमसे तुम
06-11-2011
1746-15-11-11