Showing posts with label जुदा. Show all posts
Showing posts with label जुदा. Show all posts

Saturday, March 17, 2012

अब कैसे उनसे आस लगाएँ


उनसे आस लगाएँ
घर के सामने से
निकल गए
हम उन्हें याद ना आए
अब चाहे मौसम
खुशगवार हो जाए
चांदनी रात आए
कैसे उनको को याद करें
जो खामोशी से जुदा
हो गए
बिना वजह रुस्वां
हो गए
कैसे सदा दे कर उन्हें
बुलाएं
17-03-2012
387-121-03-12

Sunday, November 6, 2011

टूटे हुए दिल को क्यूं और तोड़ते हो तुम?


चेहरे को देख
हाल-ऐ-दिल
जान लेते हो तुम
फिर क्यूं 
सताते हो तुम?
देख कर क्यूं
अनदेखा करते हो तुम?
ज़ख्मों में निरंतर नश्तर
 चुभाते हो तुम
टूटे हुए दिल को
क्यूं और तोड़ते हो तुम?
माना कि जुदा हो गए
हमसे तुम
साथ गुजारे लम्हों के
खातिर ही सही
कम से कम नज़रें तो
मिला लिया करो
हमसे तुम
06-11-2011
1746-15-11-11

Monday, October 24, 2011

तुम्हारी चुप्पी तुम्हारे ग़मों की कहानी कह रही है


तुम्हारी चुप्पी
तुम्हारे ग़मों की कहानी
कह रही है
नहीं मिलने की मजबूरी
तुम्हें खामोश रख रही है
जब सुनने वाला ही नहीं
कहने से फायदा भी क्या
कह कर भी सहना है
चुप रह कर भी सहना है
जब मर मर कर जीना है
निरंतर जुदा रहना है
ग़मों को
अमृत समझ कर पीना है
इसके सिवाय
कोई और चारा भी
नहीं है
24-10-2011

1704-111-10-11

Wednesday, July 27, 2011

मुझसे खफा ना हुआ करो

मुझसे खफा ना

हुआ करो

बार बार दिल

दुखाया ना करो

या तो जुदा हो जाओ

या साथ पूरा निभाओ

तिल तिल कर मारा

ना करो

यूँ दिल से खेलने का

शौक पूरा ना करो

निरंतर मरने से

एक बार जान देना

अच्छा

तुम्हें कोई और मिल

जाएगा

दिल फिर से बहल

जाएगा

27-07-2011

1251-135 -07-11

Tuesday, July 12, 2011

काश मेरी नज़र से तुम भी देखते

काश मेरी नज़र से
तुम भी देखते
मेरे जहन से तुम भी
सोचते
मेरे दिल सा दिल
रखते
मुझे अपना समझते
निरंतर मुझे महसूस
करते
दूर रह कर भी
पास होते
बिछड़ कर भी गले
मिलते
कभी मुझ से जुदा
ना होते
12-07-2011
1170-54-07-11