निरंतर कुछ सोचता रहे,कुछ करता रहे,कलम के जरिए बात अपने कहता रहे.... (सर्वाधिकार सुरक्षित) ,किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का कोई प्रयोजन नहीं है,फिर भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )
मुझसे खफा ना
हुआ करो
बार बार दिल
दुखाया ना करो
या तो जुदा हो जाओ
या साथ पूरा निभाओ
तिल तिल कर मारा
ना करो
यूँ दिल से खेलने का
शौक पूरा ना करो
निरंतर मरने से
एक बार जान देना
अच्छा
तुम्हें कोई और मिल
जाएगा
दिल फिर से बहल
27-07-2011
1251-135 -07-11
Post a Comment
No comments:
Post a Comment