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Monday, May 28, 2012

शौक से




हम ज़ख्मों पर
लगाने के लिए
मलहम की तलाश में
भटक रहे हैं
वो बड़े शौक से
मारने के लिए असले
इकट्ठे कर रहे हैं
अपनी हैवानियत का
सबूत दे रहे हैं
28-05-2012
539-59-05-12

Tuesday, August 2, 2011

लिखते हुए आज एक साल पूरा हो गया

लिखते हुए आज

एक साल पूरा हो गया

एक नए अहसास से

वाकिफ हो गया

मेरी दुनिया के बाद

और भी कोई दुनिया है

मुझे पता ना था

कलम से

प्यार बचपन से था

पर शौक से कभी कुछ

लिखा ना था

एक वाकया ऐसा हुआ

परीक्षित से विचारों का

आदान प्रदान हुआ

मुझे लिखने को प्रेरित किया

एक जुनून सवार हो गया

लैपटॉप पर ऊंगलियों का

चलना शुरू हो गया

निरंतर जो देखा,

सहा,और सोचा

लिखने लगा

पूना से उत्तरांचल

तेजपुर से त्रिवेंद्रम तक

देश और विदेश से

लोगों ने होंसला बढाया

जो लिखा उसे सराहा

त्रुटियों का ध्यान दिलाया

लिखना अब आदत हो गया

बहुतों को खुश,बहुतों को

नाराज़ किया

कोई दिन नहीं गुजरता

जब दिल की बात नहीं

करता

बिना सृजन अब कुछ अच्छा

नहीं लगता

निरंतर लिखना मजबूरी

और जीने का मकसद

बन गया

(मेरे प्रेरणा स्त्रोत डा.परीक्षित सिंह,य़ू ,एस, ए को समर्पित)

02-08-2011

1289-11-08-11


Wednesday, July 27, 2011

मुझसे खफा ना हुआ करो

मुझसे खफा ना

हुआ करो

बार बार दिल

दुखाया ना करो

या तो जुदा हो जाओ

या साथ पूरा निभाओ

तिल तिल कर मारा

ना करो

यूँ दिल से खेलने का

शौक पूरा ना करो

निरंतर मरने से

एक बार जान देना

अच्छा

तुम्हें कोई और मिल

जाएगा

दिल फिर से बहल

जाएगा

27-07-2011

1251-135 -07-11