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Tuesday, March 5, 2013

कहीं ऐसा ना हो


तुम्हारा ख़त मिला
उसमें लिखा
तुम्हारा पैगाम मिला
घर वाले हमारी नियत पर
शक करते हैं
इसलिए अब हमसे
बात नहीं कर पाओगी
घर में फजीहत नहीं
करवाओगी
कभी ये भी सोचा तुमने
घर वाले तो तुम पर भी
यकीन नहीं करते
गर यकीन होता
तो हमारी नियत पर
सवाल ही नहीं उठाते
मिलो ना मिलो हमसे
हम नहीं चाहते
तुम्हारा घर बिगड़े
हम तुम्हें चाहते रहेंगे
पाक रिश्ते को
दिल में बनाए रखेंगे
बस घबराते हैं
आज मैं हूँ
कल कोई और होगा
कब तक वफ़ा का
इम्तहान देते रहोगे
शक से देखे जाते रहोगे
डरता हूँ
कहीं ऐसा ना हो
थक कर तुम ही कोई
नया साथ ना ढूंढ लो
घर टूटने का इलज़ाम
तुम्हारे चाहने वालों
पर लग जाए
क़त्ल करे बिना ही
उन्हें कातिल करार
दे दिया जाए
10-10-04-01-2013
शक,रिश्ता,विश्वास,
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

Monday, December 3, 2012

जब कोई मेरा अपना व्यथित हो तो



मेरे मिलने वाले पूछते हैं
आज कल आप व्यथित
क्यों रहते हो
सदा गंभीर चेहरा लिए
दिखते हो
जवाब में जब कहता हूँ
जब कोई मेरा अपना
व्यथित हो तो
मैं कैसे खुश रह सकता हूँ
सुनने को मिलता है
आपके परिवार वाले तो
सब खुश दिखते हैं
फिर आप ऐसा क्यों कहते हैं
कैसे बताऊँ
अपने केवल परिवारवाले
या रिश्तेदार नहीं होते
जो भी प्रेम रखते हैं
जिनसे भी मन मिलता है
वो भी तो मेरे अपने ही हैं
उनमें से एक भी अगर
व्यथित है
तो फिर मैं कैसे खुश
रह सकता हूँ
892-11-03-12-2012
रिश्ता,अपनापन,व्यथित,व्यथा,अपने,पराये, खुशी

Sunday, August 5, 2012

वो छोटी बहन मेरी,मैं भाई उसका



बड़ा ही
नटखट अंदाज़ उसका
पल में
रूठना पल में हँसना
स्वभाव उसका
कभी छेड़ना कभी
नाराज़ होना
कभी गुस्से में मुंह
फुलाना
पता ही नहीं चलता
कब बरसेगी ?कब हँसेगी?
उसका रंग बिरंगा
सावन भादों सा व्यवहार
मुझ को बहुत भाता
जब चिड कर
उसके सतरंगी व्यवहार पर
उसको उल्हाना देता
पलट कर कह देती
मैं ऐसी हूँ,ऐसी ही रहूँगी
मेरी चिढ ख़त्म हो जाती
मैं भी कह देता
ऐसी ही अच्छी हो
ऐसी ही चटपटी रहना
सब को खुश रखना
यूँ ही मन को लुभाना
वो छोटी बहन मेरी
मैं भाई उसका
05-08-2012
653-13-08-12

पवित्र रिश्ते को केवल धागे से मत जोड़ो



पवित्र रिश्ते को केवल
धागे से मत जोड़ो
थोड़ा सा आगे बढ़ो
त्योंहार के पहले ही
त्योंहार मनाओ
हर दिन को रक्षाबंधन
समझो
जिससे रिश्ता नहीं कोई
उसे भी बहन कह दो
निरंतर उसकी रक्षा का
प्रण कर लो
तुमसे मांगे मदद
उससे पहले ही
आवश्यकता पूछ लो
पवित्र रिश्ते को नाम
ना दो
उसे स्नेह विश्वास से
जी लो
05-08-2012
652-12-08-12

Friday, August 3, 2012

वो भाई बहन का रिश्ता ही क्या?



वो भाई बहन का
रिश्ता ही क्या?
जिसमें
लड़ना झगड़ना ना हो
रूठना मनाना ना हो
साथ हंसना रोना ना हो
एक दूजे का ख्याल
आता ना हो
मिले बिना चैन
आता हो
दूर रहो या पास
एक दूजे के बिना
मन खुश रहता हो
प्रेम का
धागा बांधो ना बांधो
हर पल
दुआ निकलती ना हो
03-08-2012
646-06-08-12

Thursday, June 7, 2012

उन्होंने मुझे पुकारा




उन्होंने मुझे पुकारा
मैंने भी मुस्कराकर
उनका अभिवादन किया
पहले मिला नहीं आपसे
फिर भी बताइये
क्या काम है
तपाक से कह दिया
वो पहले तो झेंपे
फिर मुस्काराकर बोले
क्षमा करें गलतफहमी में
किसी और की जगह
आपको पुकार लिया
फिर अपना परिचय दिया
पड़ोस की कॉलोनी में
रहते थे
मेरे समकक्ष सरकारी
नौकर थे
आज के समय में
जब जानने वालों से
रिश्ता निभाना कठिन होता
गलतफहमी ने
हमारे बीच मित्रता का
मधुर रिश्ता बना दिया
06-06-2012
576-26-06-12

Wednesday, April 18, 2012

वो कहीं दूर रहती है


वो कहीं दूर रहती है
उसे भी वही
चाँद दिखता होगा
जो मुझे दिखता है
वो भी सूरज की उसी
धूप में नाहती होगी
जिसमें मैं नाहता हूँ
फर्क इतना ही है
उसकी नाज़ुक चमड़ी
चांदनी में भी जलती हैं
मुझ पर तेज़ धूप का भी
कोई असर नहीं होता
तुम्ही बताओ वो
मेरी कैसे हो सकती है ?
18-04-2012
457-38-04-12

Tuesday, April 17, 2012

क्या यह प्यार नहीं है ?



कैसे कह दिया तुमने ?
मैं तुम्हें प्यार नहीं करता
तुम्हें गले नहीं लगाता
तुम्हें चूमता नहीं हूँ
अपनी बाहों में नहीं
लेता
तुम्हारे करीब नहीं हूँ
इसका अर्थ ये नहीं कि
मैं तुमसे प्यार नहीं करता
पल पल तुम्हें याद
करता हूँ
तुम्हारी कमी मुझे
व्यथित करती है
जब भी निराश होता हूँ
पूर्ण विश्वास से
तुम्हारी तरफ देखता हूँ 
तुम ही समस्या का
कोई हल सुझाओगी
मुझे समस्या से बाहर
लाओगी
मेरे जीवन की हर बात
केवल तुमसे सांझा करता हूँ
जीवन के हर विषय पर
सिर्फ तुमसे चर्चा करता हूँ
तुमसे एक दिन भी
बात ना हो
तो परेशान हो जाता हूँ
तुम्हारी कुशलता का
समाचार नहीं मिले
जब तक सो नहीं पाता
प्यार क्या सिर्फ
जिस्मानी रिश्ता ही
होता है ?
अब तुम्ही बताओ
क्या यह प्यार नहीं है ?
17-04-2012
444-24-04-12

Sunday, March 18, 2012

एक अजीब सा रिश्ता मेरा दर्द से

एक अजीब सा रिश्ता मेरा
दर्द  से
खुशी का एक पल भी नहीं
सुहाता उसे
उसकी आहट भर से ही भेष
बदल बदल कर आ जाता
कभी चोट,कभी बीमारी
अपनों की नाराजगी
कभी दुनियादारी में  
तकलीफ बन कर आ
धमकता
हंसने के लिए मुंह खोला नहीं
तुरंत अपनापन जताता
बहुत मोहब्बत दर्द को
मुझसे
कमबख्त पीछा ही नहीं
छोड़ता
अब सहने की आदत हो गयी
दोस्ती हो गयी उससे
बिना उसके अब मन भी
नहीं लगता
एक अजीब सा रिश्ता मेरा
दर्द  से
18-03-2012
397-131-03-12

Tuesday, January 10, 2012

कैसे बताऊँ क्या है दिल में तुम्हारे लिए?


कैसे बताऊँ क्या है
दिल में तुम्हारे लिए?
कैसे कहूं
क्या मिलता है मुझे
तुमसे गुफ्तगू कर के?
क्यों तुम्हारा नाम आता है ?
जहन में बार बार
न तुम माशूक मेरे
ना मैं आशिक तुम्हारा
फिर भी मन नहीं मानता
खामोश रहने के लिए
कैसे समझाऊँ?
कुछ तो
मिलता होगा तुमसे
जो मिला नहीं मुझे
अभी तक अपनों से
दिल रोता रहा अब तक
जिसको पाने के लिए
कोई तो है
जो समझता है मुझ को
ऐसा अहसास होता है
दिल को सुकून 
ज़ज्बातों को मुकाम
मिलता है
रिश्ता पिछले जन्म का
लगता है
अकेला नहीं हूँ ऐसा
लगता है
कैसे बताऊँ क्या है
दिल में तुम्हारे लिए?
10-01-2012
24-24-01-12

Sunday, October 23, 2011

जो ना हो सका बरसों में इंटरनेट ने कर दिया


एक दूसरे को
जानते तक नहीं
ना कभी मिले
ना कभी देखा
इंटरनेट की दुनिया से
परिचय हुआ
ईमेल,चैटिंग के जरिये
कुछ उन्होंने कहा
कुछ मैंने कहा
कई मसलों पर
 विचारों का
आदान प्रदान हुआ
दोनों को सुखद लगा
एक नया रिश्ता बना
निरंतर ठहरा हुआ
जीवन गतिमान हुआ
एक दोस्त मुझे
एक उन्हें मिला
जो ना हो सका
बरसों में
 इंटरनेट ने कर
दिया
23-10-2011
1696-103-10-11

Wednesday, October 12, 2011

कुछ लोगों से मन मिल गया


कुछ लोगों से मन
मिल गया
कुछ लोगों से मन
मिल गया
एक अजीब सा रिश्ता
हो गया
मन,मन का दोस्त
हो गया
ना देखूं उन्हें
ना सुनूं उन्हें जब तक
लगता दिन अधूरा
रह गया
दिल से दुआ
निकलती उनके लिए
झोली भर खुशी
मिले उन्हें
निरंतर ख्याल उनका
रहता
मन में अपार स्नेह
उमड़ता
मन खुद से पूछता
पहले उनसे
क्यों नहीं मिला
उनकी चुप्पी मन को
व्यथित करती
दिल को खलती
रहती
मिलने की इच्छा
बढ़ती जाती
कुछ लोगों से मन
मिल गया........
12-10-2011
1634-42-10-11