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Sunday, July 17, 2011

हर लफ्ज तेरी यादों में ढला

हर लफ्ज
तेरी यादों में ढला
जहन तेरे
ख्यालों से भरा
हर नज़्म में होता
ज़िक्र तेरा
दिल निरंतर गम में
रोता
डगर मोहब्बत की
चुनी मैंने
सिला जो भी हो 
मंज़ूर मुझे
17-07-2011
1199-79-07-11

Tuesday, July 12, 2011

काश मेरी नज़र से तुम भी देखते

काश मेरी नज़र से
तुम भी देखते
मेरे जहन से तुम भी
सोचते
मेरे दिल सा दिल
रखते
मुझे अपना समझते
निरंतर मुझे महसूस
करते
दूर रह कर भी
पास होते
बिछड़ कर भी गले
मिलते
कभी मुझ से जुदा
ना होते
12-07-2011
1170-54-07-11

Monday, July 11, 2011

दिल करता

दिल करता
जहन के
दरीचे खोल दूं
उसमें 
भरा नफरत का
कचरा फैंक दूं
झाड पोंछ कर
साफ़ करूँ
नए ख्यालों से 
सजाऊँ
मोहब्बत के 
फूलों से भर दूं
निरंतर लोगों को
गले से लगाऊँ
दुआओं से नवाजूं
हंसू और हंसाऊं
हर दिन दीपावली
ईद मनाऊँ
11-07-2011
1165-49-07-11
(दरीचे =खिड़कियाँ,नवाजूं =भेंट देना,अनुग्रह,सहायता )

Monday, April 11, 2011

काश,जहन में आइना होता


काश
जहन में आइना होता
सब को
सब कुछ साफ़ साफ़
दिखता
ना कोई किसी को,
किसी के लिए बरगलाता
ना कोई बहम रखता
जो आँखों से दिखता
सिर्फ उस को सच मानता
निरंतर दूसरों को सुकून से
जीने देता
खुद भी सुकून से
जीता
11-04-2011
655-88-04-11