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Thursday, October 25, 2012

ठण्ड का अहसास



जेठ की तेज़ गर्मी से
लहुलुहान दोपहर
लू से घबराकर
हर आदमी घर में
दुबका हुआ
चिड़ियाएँ खोमोशी से
घोंसलों में नींद ले रही
लू और गर्मी से
बिना घबराए
वो उसके इंतजार में
गली के नुक्कड़ पर
खड़े हो कर
रोज़ उसका इंतज़ार
करता
यही तो वो मौक़ा
किसी की नज़रों में आये
बिना वो अकेले में
उससे मिल सकता
तेज़ गर्मी और लू में भी उसे
ठण्ड का अहसास मिलता
792-34-25-10-2012
मोहब्बत,इंतज़ार,मुलाक़ात,अहसास

Tuesday, August 21, 2012

उसे देखते ही



उसे देखते ही
मोहब्बत के बादल
दिल में गरजने लगे
खुशी से झूम कर बरसेंगे
प्यार की नदियाँ
उफन कर बहने लगेगी
दोनों के बीच
कोई दूजा ना होगा
दो हो कर भी हम एक होंगे
दो साज़ एक सुर होंगे
बस उसकी रज़ा का
 इंतजार है
जब तक नहीं मिले
बरसात के मौसम में भी
सूखे का अहसास
होता रहेगा
21-08-2012
666-26-08-12

Friday, March 9, 2012

अभी से जाने का नाम ना लो

अभी से
जाने का नाम ना लो
कुछ देर तो मेरे पास बैठो
अभी तो ठीक से देखा
भी नहीं
मन भरना तो बहुत
दूर की बात
मेरे रोम रोम में समा जाओ
अपनी रूह को
मेरी रूह में मिल जाने दो
जाने से पहले
कुछ ऐसा कर जाओ
दिल कभी ना रहे उदास
हर लम्हा
अहसास रहे तुम्हारा
फिर चाहो तो चले जाना
09-03-2012
333-67-03-12

Thursday, February 9, 2012

क्या ये ही काफी नहीं?

क्या फर्क पड़ता है ?
गर मेरे चेहरे पर  
तुम्हारा 
नाम नहीं पढता कोई
मेरे दिल में तुम्हारी 
तस्वीर नहीं देखता कोई
मेरे जहन में बसे तुम्हारे 
ख्याल को 
 समझता नहीं कोई
मेरी हर साँस से
जुडी तुम्हारी साँस का
अहसास किसी को नहीं
मेरे,तुम्हारे एक होने को
महसूस करता नहीं कोई
तुम मेरे लिए
मैं तुम्हारे लिए जीता हूँ
क्या ये ही काफी नहीं?
09-02-2012
129-40-02-12

Tuesday, February 7, 2012

तुम्हारा अहसास ही काफी है


तुम्हारी हर अदा
जहन में 
उतर जाती है
तुम्हारी हर बात
दिल को छूती है
तुम्हारी खुशबू
मदहोश करती है
तुम्हें पाया तो नहीं
जीने के लिए
तुम्हारा अहसास ही
काफी है
07-02-2012
115-26-02-12

Monday, February 6, 2012

उनका मुस्काराना ....

उनका
हमारी तरफ देख कर
मुस्काराना
कुछ ऐसा अहसास दे गया
मानो किसी पेड़ के
धूल  से भरे पत्तों को
बरसात ने धो कर
फिर से चमका दिया
पत्ते जो पीले पड़ने वाले थे
उनमें जीने के लिए
नया जोश से भर दिया
अब कमी है तो सिर्फ
एक बात की
बस वो एक बार कह दें
उन्होंने
हमें अपना मान लिया
हमें भी कुछ ऐसा लगेगा
जैसे किसी पेड़ में
कभी फूल नहीं खिलते थे
वो फूलों से लद गया
उसकी महक से सारा
इलाका मस्त हो गया
06-02-2012
113-24-02-12

Saturday, December 24, 2011

उनकी याद ही काफी है अब रुलाने के लिए

उनका
 ज़िक्र ही काफी है
दिल जलाने के लिए
उनकी याद ही काफी है
अब रुलाने के लिए
उनकी रुसवाई देख ली
हँसते हँसते जान लेने की
अदा देख ली
वादों की कुर्बानी देख ली  
दोजख का
अहसास कर लिया
ज़मीं पर
अब कुछ बाकी नहीं
देखने के लिए
24-12-2011
1887-55-12

Saturday, December 10, 2011

गर दिल यूँ ही सताता रहेगा


गर दिल यूँ ही
सताता रहेगा
उम्र का लिहाज भी
ना करेगा
कभी बूढा ना होने देगा 
निरंतर
नए ख्वाब दिखाता  
रहेगा
इंतज़ार में डूबा
रखेगा
तो कहीं मरना ही
ना भूल जाऊं
मर भी जाऊं
तो जाकर लौट
आऊँगा
हसीं अहसासों का
लुत्फ़ लेता रहूँगा
लम्हा लम्हा मस्ती में
जीता रहूँगा
10-12-2011
1850-18-12

Friday, December 9, 2011

शुक्रिया आपका


एक नया
अहसास दिया आपने
जहन से पर्दा उठाया
आपने 
ज़िन्दगी जीने का
मकसद समझाया
आपने
फिर से हँसने का
रास्ता दिखाया
आपने
ग़मों में डूबे रहने का
सबब बताया
आपने
गिर कर उठने का
तरीका सिखाया
आपने
शुक्रिया आपका
सूखे लबों को फिर से
थिरकाया आपने
निरंतर रोते हुए को
हँसाया आपने 
09-12-2011
1848-16-12