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Monday, March 4, 2013

हर इच्छा किसकी पूरी होती है



रोज़ चमकते चमकते
सूरज बेचारा थक गया
थक हार कर अपनी व्यथा
चाँद को बताने लगा
तुम कितने खुश किस्मत हो
पूनम को पूरे खिलते हो
बाकी समय
कम में काम चलाते हो
ना थकते हो
ना व्यथित होते हो
चाँद ने उत्तर दिया
मित्र क्यों ऐसा सोचते हो
हर इच्छा
किसकी पूरी होती है
मैं भी चाहता हूँ
सातों दिन पूर्णिमा हो
जैसे तुम हर दिन
चमकते हो
वैसे ही मैं भी हर दिन
चमकूँ
नित्य धरती को
चांदनी से भर दूं
08-08-03-01-2013

चाँद,सूरज,इच्छाएं,आशाएं ,कामना,आशा,
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

Thursday, October 13, 2011

आशा में निराश नहीं होता


मुझे पता है
तुम्हें पा नहीं सकता
कितना भी चाहूँ
ह्रदय की कामना
पूरी  कर नहीं सकता
फिर भी हिरन सामान  
मरीचिका
देख खुश होता
आशा में 
निराश नहीं होता
निरंतर 
प्रेम की तलाश में
भटकता रहता
मन निरंतर खुद से
प्रश्न करता
जानते पूछते
ऐसा क्यों करता ?
मन ही उत्तर भी देता
कम से कम इस बहाने
तुम्हें याद तो करता
आँखों में दिन भर
चेहरा
तुम्हारा रहता
मन मष्तिष्क तुम में
समाता 
निरंतर आशा में
जीने का पाठ पढाता
वैसे भी सब इच्छाएं
किसकी पूरी होती
जो मेरी होगी
इस बहाने दूर से ही सही
दिल से तुमसे नज़दीकी
बनी रहती
दिल को राहत मिलती
तुम्हारे ख्याल से ही
खुश होता रहता
ज़िन्दगी के पड़ाव पार
करता जाता
चाहत में जीता जाता
13-10-2011
1641-49-10-11