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Monday, March 4, 2013

हर इच्छा किसकी पूरी होती है



रोज़ चमकते चमकते
सूरज बेचारा थक गया
थक हार कर अपनी व्यथा
चाँद को बताने लगा
तुम कितने खुश किस्मत हो
पूनम को पूरे खिलते हो
बाकी समय
कम में काम चलाते हो
ना थकते हो
ना व्यथित होते हो
चाँद ने उत्तर दिया
मित्र क्यों ऐसा सोचते हो
हर इच्छा
किसकी पूरी होती है
मैं भी चाहता हूँ
सातों दिन पूर्णिमा हो
जैसे तुम हर दिन
चमकते हो
वैसे ही मैं भी हर दिन
चमकूँ
नित्य धरती को
चांदनी से भर दूं
08-08-03-01-2013

चाँद,सूरज,इच्छाएं,आशाएं ,कामना,आशा,
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

Saturday, November 3, 2012

वो चाँद तो नहीं बन सकते



चाँद के साथ
सितारे भी चमकते
चाँद की चमक से
घबराते नहीं
चांदनी में भी चमकते
छोटे हुए तो क्या हुआ
अपना वजूद बनाए
रखते हैं
दुनिया को सन्देश देते
वो चाँद तो नहीं बन
सकते
पर चमक अवश्य
सकते
820-04-03-11-2012
चाँद,सितारे,चमक,जीवन,सीख,सोच

Sunday, October 28, 2012

दूर रहते हुए भी



नित्य की भाँति
कल रात भी चाँद
मेरे कमरे की
खिड़की से झाँक रहा था
पूरे कमरे को चांदनी से
नहला रहा था
शीतल चांदनी और खिड़की से
झांकते चाँद को देख
मन मुझसे कहने लगा
चाँद से पूछों
क्यों केवल चांदनी को
भेज कर काम चलाता
ये कौन सा रिश्ता निभाता
मेरे पूछने से पहले ही
चाँद समझ गया मन
क्या चाहता है
चाँद बोला मैं मित्रता का
रिश्ता निभाता हूँ
निरंतर दूर रह कर भी
प्रेम दर्शाता हूँ
चांदनी को नित्य धरती पर
भेजता हूँ
रात के अँधेरे को दूर कर के
तुम्हारा जीना आसान
करता हूँ
रिश्तों को निभाने के लिए
नित्य मिलना ही
आवश्यक नहीं होता
 दूर रहते हुए भी रिश्तों को
 निभाया जा सकता
संवाद बनाया जा सकता
अनेकानेक तरीकों से मित्र
मित्र की मदद कर सकता
चांदनी की
सुन्दर भेंट के साथ
चाँद सुन्दर सीख भी
दे गया
मन को भाव विव्हल
कर गया
810-52-28-10-2012
चाँद ,चांदनी,रिश्ते,मित्र,मित्रता

Wednesday, October 10, 2012

काश धरती का आँगन भी आकाश सा होता



आकाश के आंगन में
तारे जगमगाते
चाँद ठंडक
सूर्य गर्मी बिखेरता
पक्षी स्वछन्द उड़ते
रेशम से कोमल बादल
अठखेलियाँ करते 
कोई किसी किसी से
कुछ नहीं कहता
ना ही किसी के लिए
रुकावट बनता
जिसे जो भी
जब भी करना है
अपनी इच्छा से करता
काश धरती का
आँगन भी
आकाश सा होता
770-15-10-10-2012
धरती,आकाश,चाँद ,सूरज

Monday, March 12, 2012

चाँद को देख कर क्या करूंगा,जब तुम सामने खडी हो

चाँद को
देख कर क्या करूंगा
जब तुम सामने खडी हो
तारों की झिलमिलाहट भी
तुम्हारी झिलमिलाहट से
तो कम है
चाँद पहुंचाता ज़मीन को
ठंडक
दिल फिर भी प्यासा
रह जाता
तुम ठंडक के साथ
दिल की
प्यास भी बुझाती हो
हर मामले में चाँद को
शर्माती हो
  गर खुदा को पता होता
तुम्हारी ख़ूबसूरती का
चाँद को
भेजता ज़मीं पर
तुम्हें चाँद की जगह
अपने पास रखता
12-03-2012
351-85-03-12

Saturday, November 5, 2011

चाँद ने उन्हें देखा तो शरमा गया


चाँद ने
उन्हें देखा तो
शरमा गया
कोई उसे से भी
खूबसूरत है
उसे पता ना था
मन ही मन सोचने
लगा
खुदा का ढंग भी
निरंतर
निराला होता  
सारा जहां उसे
खूबसूरत कहता  
खुदा चुपके से
उस से
सुन्दर चेहरा
घडता   
03-11-2011
1743-12-11-11

Thursday, July 28, 2011

इसे देखूं या उसे देखूं ?

दो चाँद

दो चाँद

जहाँ में खिले

इक ज़मीं पर

इक आसमाँ में

दोनों अक्स इक दूजे के

दिल सोच में फँसा

किसे देखूं ?,

किसे ना देखूं ?

दोनों टुकड़े दिल के मेरे

ना दिल तोड़ सकता

ना नाराज़ कर सकता

ख्यालों के

चौराहे पर खडा हूँ

निरंतर खुद से पूंछता हूँ

इसे देखूं या उसे देखूं ?

या रज़ा

उनकी पूँछ लूं ?

28-07-2011

1258-142 -07-11

जहाँ में खिले

इक ज़मीं पर

इक आसमाँ में

दोनों अक्स इक दूजे के

दिल सोच में फँसा

किसे देखूं ,किसे ना देखूं

दोनों टुकड़े दिल के मेरे

ना दिल तोड़ सकता

ना नाराज़ कर सकता

ख्यालों के

चौराहे पर खडा हूँ

निरंतर खुद से पूंछता हूँ

इसे देखूं या उसे देखूं ?

या रज़ा

उनकी पूँछ लूं ?

28-07-2011

1258-142 -07-11