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Tuesday, June 5, 2012

झीना सा पर्दा



खूबसूरत
गुलाबी चेहरा
नागिन से लहराते
बाल
झील सी गहरी
नीली आँखें
रस भरे पतले होठ
मचल करहवा में
उड़ता हुआ दुपट्टा
तितली जैसे
रंग बिरंगे परिधान में
परी लग रही थी
शिकारी से बेखबर
हिरनी की
मदमाती चाल से
चली आ रही थी
चाहते हुए भी उसे
छू नहीं सका
ख्वाब और हकीकत
के बीच
एक झीना सा पर्दा था
उधर वो थी ,इधर में था

ये हकीकत नहीं
रोज़ दिखने वाला 
ख्वाब था
05-06-2012
563-13-06-12


Sunday, June 3, 2012

आज फिर ज़ख्म हरे हो गए

आज फिर ज़ख्म हरे
हो गए
वो हमारे सामने से
निकल गए
देख कर भी अनदेखा
कर गए
अपनी तंगदिली पर
मोहर लगा गए
ये ज़रूरी नहीं है
खूबसूरत चेहरों के
दिल भी खूबसूरत हो
हमें हकीकत से
रूबरू करा गए
03-06-2012
558-78-05-12

Monday, March 5, 2012

मजबूरी में उसका हाथ थाम लिया

मुझ पर तोहमत
ना लगाओ
मैंने तो नहीं चाहा
उसकी तमन्ना बनूँ
मैंने तो सिर्फ चाहा था
वो तन्हा ना रहे
तन्हाई में अश्क ना
बहाए
रो रो कर झील सी
नीली आँखों की
ख़ूबसूरती ना खो दे
मैंने तो चाहा तो
वो मायूस ना रहे
मायूसी में
जिंदा रहने की ख्वाइश
ना छोड़  दे
मैं कद्रदां हूँ खूबसूरत
चेहरों का
आशिक हूँ नशीली
आँखों का
कैसे ये सब बर्दाश्त
करता
मजबूरी में उसका
हाथ थाम लिया
05-03-2012
294-29-03-12

Wednesday, January 11, 2012

काले दुपट्टे में


अमावस की रात को
काले दुपट्टे से ढके चेहरे में 
वो पूनम के चाँद सी
दिख रही थी
आँखों को यकीन नहीं
हो रहा था
चाँद करीब से देखने पर
इतना खूबसूरत होता है
आँखें बंद होने का
नाम नहीं ले रही थी
दिल करने लगा उसे
देखता ही रहूँ
दो बात करूँ
तभी उसने दुपट्टे से मुंह
ढक लिया
अन्धेरा छा गया
लगा चाँद छुप गया
थोड़ी देर
इंतज़ार करता रहा
गौर से देखा तो
सामने कोई नहीं था
उजाले को फिर
अँधेरे में बदल कर
वो जा चुकी थी
मैं फिर उजाले की
तलाश में निकल पडा
तब से अब तक भटक
रहा हूँ ,
उजाले को ढूंढ रहा हूँ
11-01-2012
32-32-01-12

Saturday, November 5, 2011

चाँद ने उन्हें देखा तो शरमा गया


चाँद ने
उन्हें देखा तो
शरमा गया
कोई उसे से भी
खूबसूरत है
उसे पता ना था
मन ही मन सोचने
लगा
खुदा का ढंग भी
निरंतर
निराला होता  
सारा जहां उसे
खूबसूरत कहता  
खुदा चुपके से
उस से
सुन्दर चेहरा
घडता   
03-11-2011
1743-12-11-11

Friday, July 15, 2011

आँखों ने रोना ,दिल ने तडपना छोड़ दिया

आँखों ने रोना
दिल ने तडपना
छोड़ दिया
खूबसूरत चेहरों ने,
शोख अंदाज़ ने
लुभाना छोड़ दिया
अब हमने उम्मीद
करना छोड़ दिया
खुद पर
काबू कर लिया
चुप रहना,
हंस कर बर्दाश्त
करना सीख लिया
निरंतर मर कर भी 
जीना सीख लिया
बिना किश्ती के
किनारा ढूंढ लिया
15-07-2011
1185-68-07-11