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Sunday, November 11, 2012

मेरी तमन्ना है कोई तमन्ना ही नहीं रखूँ



मेरी तमन्ना है
कोई तमन्ना ही नहीं रखूँ
ये पूरी हो जाए
तो नयी तमन्ना क्यों रखूँ
तमन्ना का क्या
 रोज़ उठती रोज़ मरती है
एक पूरी हो जायेगी
तो दूसरी सर उठायेगी
सुकून से जीना है
तो लगाम कसनी पड़ेगी
उठने से पहले हमेशा के लिए
दबानी पड़ेगी
839-23-11-11-2012
शायरी,तमन्ना

Thursday, June 7, 2012

लूटने की तमन्ना में,खुद लुट जाते हो



लौट जाते घरोंदों में
भूल जाते चुग्गा दाना
विश्राम करते रात भर
तरोताजा उठते सवेरे में
तुम जागते हो रात भर
उठते अलसाए सवेरे में
अधिक पाने की इच्छा में
थके मांदे जुट जाते हो
ना तन को आराम
ना मन को विश्राम देते हो
ना हँसते हो ना गाते हो
भूल जाते हो
और भी बहुत कुछ
चाहिए जीवन में
डूबते जाते हो
इच्छाओं के समंदर में
 अंत तक
चैन नहीं पाते हो
लूटने की तमन्ना में
खुद लुट जाते हो
06-06-2012
575-25-06-12

Monday, March 5, 2012

मजबूरी में उसका हाथ थाम लिया

मुझ पर तोहमत
ना लगाओ
मैंने तो नहीं चाहा
उसकी तमन्ना बनूँ
मैंने तो सिर्फ चाहा था
वो तन्हा ना रहे
तन्हाई में अश्क ना
बहाए
रो रो कर झील सी
नीली आँखों की
ख़ूबसूरती ना खो दे
मैंने तो चाहा तो
वो मायूस ना रहे
मायूसी में
जिंदा रहने की ख्वाइश
ना छोड़  दे
मैं कद्रदां हूँ खूबसूरत
चेहरों का
आशिक हूँ नशीली
आँखों का
कैसे ये सब बर्दाश्त
करता
मजबूरी में उसका
हाथ थाम लिया
05-03-2012
294-29-03-12

Wednesday, October 5, 2011

ये वक़्त की बात है आप कहीं हम कहीं और हैं


ये वक़्त की बात है
आप कहीं
हम कहीं और हैं
हम किस हाल में भी रहे 
आप निरंतर खुश रहे
ये हमारे
दिल की चाहत है
आपकी
 हर आह पर दिल
हमारा रोता
पर आप हँसते रहे
ये हमारी दिली तमन्ना है
हम चाहते
आप हमें भूल जाएँ
पर हम नहीं
भूल सकते आप को
आप को याद रखना
हमारी फितरत है
आपका
गुलशन आबाद रहे
ये हमारी हसरत है
05-10-2011
1616-24-10-11

तमन्ना थी इक कंधा ढूँढ लूं


तमन्ना थी
इक कंधा ढूँढ लूं
ग़मों को 
हल्का कर लूं
इत्मीनान से बात
दिल की कह दूं
मुंह खोलता उस से

पहले ही ज़माने को

खबर हो गयी

रंजिश 
रखने वालों के
दिलों में
आग लग गयी
एक पाक रिश्ते को
इश्क का नाम
दे दिया
सारे शहर में बदनाम
कर दिया
ग़मों का बोझ और
बढ़ा दिया
निरंतर बेसहारे का
अकेला सहारा भी
छीन लिया
05-10-2011
1611-19-10-11

Thursday, September 22, 2011

तमन्ना जो भी की हमने

तमन्ना जो भी की हमने
वो नहीं मिला हमें
जो भी मिला तमन्ना से
कम नहीं मिला हमें
जिन्हें चाहा था साथ
ज़िन्दगी भर निभाएं हमारा
छोड़ गए वक़्त से पहले हमें
गिला इसका तो ज़रूर हमें  
पर जो भी बिन मांगे मिला
उसने भी रखा खुश हमें
ख्वाईशें निरंतर बढ़ रहीं
पूरी ना होंगी ,है पता हमें
जो मिलेगा होगा मंज़ूर हमें
जाना होगा दुनिया से जब  
ना होगा गम ना खुशी हमें
मान कर फैसला खुदा का
चुपचाप चले जायेंगे हम
इल्तजा कर के जायेंगे
कोई याद ना रखे हमें
22-09-2011
1544-115-09-11

Friday, July 22, 2011

ज़िन्दगी तमन्नाओं की बस्ती

ज़िन्दगी

तमन्नाओं की बस्ती

कभी हंसती,कभी रोती

धूप छाँव सी चलती

रहती

किस को सुकून

किस को बेचैनी रहेगी

खबर किसी को नहीं

होती

निरंतर उम्मीद में

कटती

हर आँख सपना देखती

एक टूटता

दूजे की तमन्ना होती

ज़िन्दगी यूँ ही कटती

22-07-2011

1213-93-07-11