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Saturday, December 8, 2012

व्यथा में



व्यथा में रोते रोते
अचानक ख्याल आया
रोने से किसी को नहीं मिला
तो मुझे कैसे मिलेगा
मन की व्यथा कम करनी है
तो क्यों ना
किसी अपने से बात कर लूं
जो मन को पसंद हो
वो काम कर लूं
अच्छा संगीत सुन लूं
अच्छी किताब पढ़ लूं
मन को हल्का कर लूं
अपने को व्यवस्थित कर लूं
फिर से काम में जुट जाऊं
फिर कभी व्यथित ना होऊँ
ऐसा सोच रख लूं
924-42-08-12-2012
व्यथा ,व्यथित,रोना ,जीवन

Saturday, March 17, 2012

जब अपने ही ज़ख्म देते हैं


जब
अपने ही ज़ख्म देते हैं
किसी और की ज़रुरत
नहीं होती
जीने की ख्वाइश भी
नहीं रहती
जब हँसना मुमकिन
नहीं होता
दिल टूट कर बिखर
चुका हो
गम दोस्त बन जाता
रोना ही साथ निभाता है
जब हर लम्हा मुझ को
मरना है
तो जी कर भी क्या
करना है
कैसे मुक्त हो जाऊं
बस अब यही सोचना है
17-03-2012
395-129-03-12

Wednesday, March 14, 2012

जितना हँस सकूँ,उतना हँस लूँ

अब थकने लगा हूँ
ज़िन्दगी से डरने लगा हूँ
क्या होगा
आने वाले बरसों में
डर से सहमने लगा हूँ
क्यों बूढा होता इंसान
निरंतर सोचता हूँ
क्यों लौटता नहीं बचपन
खुदा से पूछता हूँ
फिर खुद को संभालता हूँ
खुद से कहता हूँ
जो होना होगा हो
जाएगा
जब होगा देखा जाएगा
अभी से क्यूं
हाल को बेहाल करूँ
जितना
हँस सकूँ उतना हँस लूँ
ज़िन्दगी मस्ती में
गुजार लूँ
13-03-2012
366-100-03-12

Saturday, March 3, 2012

अब बचा नहीं कुछ बताने को

लुटा चुका सब
कुछ बचा नहीं
अब लुटाने को
इतना कुछ देख लिया
बचा नहीं अब
कुछ और देखने को
इतना रो लिया अब तक
मन नहीं करता
अब हँसने का
जी रहा हूँ किस तरह
अब बचा नहीं कुछ
बताने को
सुकून क्या होता है
भूल गया हूँ
समझता हूँ  सुकून
अब चुप रहने को
03-03-2012
287-22-03-12

Tuesday, February 14, 2012

लोग रोना तक भूल जाते

लोग
रोना तक भूल जाते
आंसू भी
उनके सूख जाते
हंसने का
तो सवाल ही नहीं
हर लम्हा
सहते सहते कटता
जीना भी
मुश्किल हो जाता
खामोशी से
यादों के सहारे ज़िंदा
रहते
मौत का इंतज़ार में
डूबे रहते
क्यूं आये थे संसार में
निरंतर सोचते रहते

14-02-2012
171-82-02-12

Monday, November 14, 2011

क्षणिकाएं -2


हँसी
हँस तो लिए
हँसाया क्यों नहीं ?
ये भी सोचा कभी
****
"मैं"
मेरी "मैंने
मुझ को मारा
ख्याल करो
तुम्हारी "मैं"
तुम्हें मारेगी
****
सत्य -विचार
सत्य होता है
इसलिए विचार आते हैं
सत्य नहीं होता तो
विचार भी नहीं आते
****
रोना
आंसूओं का
आँखों से
क्या लेना देना
अंधे भी रोते हैं
****
भावनाएं
भावनाएं आंसू
बन कर बहती हैं
मनोस्थिती
दर्शाती हैं
****
सत्य -झूठ
सत्य  के  बिना
झूठ अर्थहीन
झूठ के बिना
सत्य अर्थहीन
एक दूसरे के बिना
दोनों अस्तित्वहीन
13-11-2011
1787-58-11-11

Wednesday, August 17, 2011

ऐ ज़िन्दगी इतना ना झंझोड़ जीने का मतलब भूल जाऊँ

ऐ ज़िन्दगी
इतना ना झंझोड़
जीने का मतलब
भूल जाऊँ
ज़िन्दगी को
ग़मों का समंदर
समझ लूँ
हँसना भूल जाऊँ
निरंतर रोता रहूँ
अपना वजूद खो दूँ
गुमनामी

में चला जाऊँ

17-08-2011

1375-97-08-11