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Tuesday, January 17, 2012

वो मुझसे नाराज ,मैं उससे नाराज

वो मुझसे नाराज
मैं उससे नाराज
वो मुझे माफ़ कर दें
तो मैं उसे माफ़ कर दूं
आपस में सुलह हो
जायेगी
नाराजगी आसानी से
ख़त्म हो जायेगी
अब पहल कौन करे
झगडा इस बात  पर था
उलझन को सुलझाने लिए
मध्यस्थ ढूँढने लगे
जिसके लिए मैं कहता
वो नहीं मानता
जिसके लिए वो कहता
मैं नहीं मानता
नाराजगी पहले से
अधिक बढ़ गयी
दोनों के बीच दूरियां भी
अधिक हो गयी
समय गुजरता गया
ना मुझको चैन मिला
ना उसको चैन मिला
समय के साथ दोनों को
समझ आ गया
रिश्तों के बीच "मैं"
आ गया था
अहम् ने मष्तिष्क पर
पर्दा डाल दिया था
कारणवश झगडा सुलझ
नहीं रहा था
आत्मचिंतन किया
उसके घर की ओर
बढ़ चला
वो मेरे घर की ओर
आ रहा था
रास्ते में दोनों का
मिलना हुआ
गिला शिकवा दूर
हो गया
दोस्ती का नया दौर
शुरू हो गया
अहम् का नुकसान
पता चल गया
47-47-01-12

Monday, November 14, 2011

क्षणिकाएं -2


हँसी
हँस तो लिए
हँसाया क्यों नहीं ?
ये भी सोचा कभी
****
"मैं"
मेरी "मैं" ने
मुझ को मारा
ख्याल करो
तुम्हारी "मैं"
तुम्हें मारेगी
****
सत्य -विचार
सत्य होता है
इसलिए विचार आते हैं
सत्य नहीं होता तो
विचार भी नहीं आते
****
रोना
आंसूओं का
आँखों से
क्या लेना देना
अंधे भी रोते हैं
****
भावनाएं
भावनाएं आंसू
बन कर बहती हैं
मनोस्थिती
दर्शाती हैं
****
सत्य -झूठ
सत्य  के  बिना
झूठ अर्थहीन
झूठ के बिना
सत्य अर्थहीन
एक दूसरे के बिना
दोनों अस्तित्वहीन
13-11-2011
1787-58-11-11