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Thursday, March 7, 2013

जब मन दुखी कलम थकी हो


जब मन दुखी
कलम थकी हो
कैसे उम्मीदों की बात
लिखेगी
जब दिल में
दर्द की टीस उठ रही हो
कैसे किसी को खुश करेगी
खुद के ग़मों का बोझ
दूसरों के कन्धों पर
लाद देगी
उन्हें भी उनके ग़मों की
याद दिला देगी
14-14-07-01-2013
गम,दर्द ,दुःख
डा.राजेंद्र तेला,निरंत