हमारी हर बात
में
शायद एक हर्फ़
कम रह जाता
है
बात का मतलब
ही
बदल जाता है
तकलीफ का सबब
बन जाता है
कैसे समझाऊँ
?
खुद को बेगुनाह
बताऊँ
कहना कुछ और
चाहता हूँ
समझा कुछ और
जाता है
21-08-2012
682-42-08-12
निरंतर कुछ सोचता रहे,कुछ करता रहे,कलम के जरिए बात अपने कहता रहे.... (सर्वाधिकार सुरक्षित) ,किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का कोई प्रयोजन नहीं है,फिर भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )