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Thursday, September 1, 2011

मुरझाये फूल को ठोकर ना मारो

ठोकर ना मारो
इस तरह नफरत
ना करो
कभी निरंतर
महकता था
भंवरों को लुभाता था
गुलशन की शान
बढाता था
वक़्त की मार से
झुलस गया है
वक़्त ने कब किसे
छोड़ा है
वक़्त तुम्हारा भी
बदलेगा
इक दिन तुम्हें भी
मुरझाना होगा
उस वक़्त का अहसास
कर लो
थोड़ी सी इज्ज़त
बक्श  दो
थोड़ा सा प्यार दे दो
मिट्टी में दफना दो
01-09-2011
1430-05-09-11

Wednesday, July 20, 2011

पराग का मिठास निरंतर लुभाता

 पराग का मिठास
निरंतर लुभाता
हर जुबान को
लपलपाता
जितना मीठा
दिखता
उतना है या नहीं
चखने वाला ही
जानता
बावक्त कड़वा
निकलता
आँखों में आँसू
लाता
जीवन की
हकीकत दर्शाता
20-07-2011
1208-88-07-11

Tuesday, July 19, 2011

हाल-ऐ-दिल गर चेहरा बताता

हाल-ऐ-दिल
गर चेहरा बताता
इंसान कभी धोखा
ना खाता
चेहरा पहले लुभाता
चमक से
चकाचौंध करता
फिर ठोकर खिलाता
इंसान को निरंतर
भ्रम में रखता
19-07-2011
1205-85-07-11