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Monday, November 14, 2011

मेरे मन की जान लो

तुम्हें
कभी देखा नहीं
फिर भी तुम से
प्यार है
पता नहीं
कभी मिलूंगा भी
या नहीं
फिर भी
मन मानता नहीं
निरंतर
तुम्हारे लिए
व्याकुल रहता
कुशलता के लिए
प्रार्थना करता
मेरे मन की
जान लो
बस इतना सा
ख्याल कर लो
कभी मिलो तो
 पहचान लेना
 मुस्करा कर
देख लेना
14-11-2011
1789-60-11-11

Saturday, August 27, 2011

आज तुम्हारा चेहरा नज़र नहीं आया

नज़र नहीं आया
पता नहीं क्यों
तुमने इतना तरसाया
दिन भर इंतज़ार
करता रहा
ज़रा सी आहट पर
दरवाज़े तक
दौड़ लगाता रहा
गली के
आखिरी छोर तक
व्याकुल निगाहों से
ढूंढता रहा
निरंतर बेचैनी में
सोचता रहा
तुम्हारी खैरियत की
दुआ करता रहा
कल नज़र आओगे
उम्मीद  करता रहा
27-08-2011
11405-127-08-11