Showing posts with label satire. Show all posts
Showing posts with label satire. Show all posts

Monday, April 25, 2011

बेअक्ल



अक्ल होती तो
सेहत का ख्याल रखता
ना बीमार होता
ना चारागर उन्हें बनाता
ना उनके जाल में  फंसता
ना इश्क करता
ना दिल उनको देता 
ना बेवफा कहलाता
ना बदनाम होता
ना कब्र अपनी खोदता
ना तिल तिल मरता
ना सलाह तुम को देता
ना बेअक्ल कहलाता
निरंतर हंस कर
ज़िन्दगी गुजारता
24-04-2011
752-172-04-11
१.चारागर=डाक्टर,हकीम

Tuesday, March 29, 2011

वर्तमान


मन में
दुखी हो रहा था
हालात  पर
चिंतन कर रहा था
तभी मित्र “वर्तमान” का
आना हुआ
आते ही परेशानी का
कारण पूछा
मैंने उन्हें बड़े भाई
सज्जन जी के बारे में
बताया
उनकी ख़ूबियों का
वर्णन किया
इमानदारी और सज्जनता के
किस्से सुनाए
अफसर उन से खुश नहीं
तरक्की भी कभी मिली नहीं
इस बात से व्यथित हूँ
मित्र बोला भाई निरंतर
आज कल कौन
इमानदारी और सज्जनता को
महत्त्व देता
वर्तमान में रहने को कहो
भ्रष्ट बनने को कहो
अफसर भी खुश होंगे
जेब नोट से भरेगी
तरक्की भी मिलेगी
प्रारम्भ में मन को
तकलीफ होगी
बाद में आदत
पड़ जायेगी  
29-03-03
538—208-03-11