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Monday, July 25, 2011

"हाई","हैलो"को छोडो आज से नमस्कार करो

"हाई","हैलो"को छोडो

आज से नमस्कार करो

बड़ों को अग्रज

छोटों को अनुज कहो

सब को समझ आये

ऐसी हिंदी

बोलो और लिखो

हिंदी का प्रचार करो

कठिन शब्दों का

प्रयोग कम करो

जिन्हें नहीं आती

उन्हें सिखाओ

मन से भय हटाओ

सब भाषाओं की रानी है

क्षण :क्षण:समझाओ

हिंदी में भाषण दो

हिंदी में चर्चा करो

अंग्रेज़ी के चहेतों से भी

बात हिंदी में करो

सब भाषाओं का

सम्मान करो

मात्रभूमी की भाषा से

निरंतर प्यार करो

हिन्दी मेरी भाषा है

कहने में गर्व करो

25-07-2011

1226-106-07-11

Saturday, April 9, 2011

बड़े कमरों के दरवाज़े छोटे हो गए

बड़े कमरों के
दरवाज़े छोटे हो गए
दिल छोटे
दरवाज़े बड़े हो गए
सब अपने में समेटना
चाहते
पर देना नहीं चाहते
देना सब भूल गए
सिर्फ लेना
अब ध्येय रह गया
निरंतर स्वार्थ बढ़ रहा
आदमी "मैं " में सिमट गया
"
मैं "और "मेरा"
दिल-ओ-दिमाग में
बस गया
रास्ते से भटक गया
इश्वर से दूर हो गया  
फिर भी मंजिल पाना
चाहता
जीवन को सार्थक बनाना
चाहता
सुकून से रहना चाहता
09-04-2011
634-67-04-11

Tuesday, April 5, 2011

जब वो मेरी बस्ती से गुजरते

जब वो
मेरी बस्ती से गुजरते
सब अपने को प्यासा
समझते
पहले प्यास उसकी बुझे
हसरत से उन्हें देखते
वो निगाह जिस पे डालते
बिना पिए मदहोश
उस को करते
निरंतर अदाओं से
सब को बेहोश करते
चुपचाप सब उन्हें
देखते रहते
वो आराम से गुजर
जाते
होश में आने पर सब
हाथ मलते
फिर से उनके लौटने का
इंतज़ार करते 
05-04-2011
608-41 -04-11
 

Monday, April 4, 2011

वो निरंतर मुखालते में रहते थे

बड़े अरमानों से
खटखटाया
दरवाज़ा उनके घर का
दरवाज़ा खुला ,
वो सामने खड़े थे
बड़ी बेदर्दी से
ठोकर मार कर 
निकाला हमें
ये भी ना पूछा
क्यूं आये 
हम उनके घर पे ?
वो निरंतर मुखालते में
रहते थे
सब को एक नज़र से
देखते थे
हम न्योता हमारी शादी का
देने गए थे
उन्होंने समझा प्यार का
 इज़हार करने आये हैं
04-04-2011
598—31 -04-11
   

खुल्लम खुल्ला प्यार करो


पिताजी
बचपन में कहते थे
 लोगों  से  मिला  करो
हाल चाल जाना करो
अपनों को याद करा करो
चिठ्ठी पत्री लिखा करो
हाल अपना बताया करो
अच्छा साहित्य पढ़ा करो
मन को स्वस्थ रखा करो
छोटों को प्यार करा करो
बड़ों का सम्मान दिया करो
केवल अपना ना सोचा करो
चिंता सब की करा करो
शर्म लिहाज रखा करो
अब बच्चों से सुनता हूँ
मतलब हो तो मिला करो 
चैटिंग से बात करा करो
एस ऍम  एस  भेज
काम चलाया करो
फेस बुक पर
हाल चाल बताया करो
इंटरनैट पर पढ़ लिया करो
उम्र की ना सोचा करो
छोटों,बड़ों को
बराबर समझा करो
जानो नहीं तो
बात भी ना करा करो
परवाह किसी की मत करो
निरंतर अपनी सोचा करो
खुल्लम खुल्ला प्यार करो
शर्म लिहाज को ताक़
में रखो
04-04--11
592—25 -04-11

Thursday, March 31, 2011

रिश्ते तो रिश्ते होते



रिश्ते
बनाने से नहीं बनते
किस्मत से मिले रिश्ते
सदा दिल से नहीं जुड़ते
मजबूरी में ढ़ोने पड़ते
मन के रिश्ते खुद बनते
दिल में गुदगुदी करते
रिश्ते
निभाना आसान नहीं
रिश्तों में बहुत कुछ
सहना होता
दूसरे को समझना होता 
सब्र रखना पड़ता 
खुद से ज्यादा ख्याल
दूसरे का रखना होता
खुद रो कर दूसरे को
हंसाना पड़ता 
दिल लुटा कर
चुप रहना पड़ता
रिश्ते तो रिश्ते होते
निरंतर
बनते बिगड़ते रहते
जिस के कम बिगड़े
उसे भाग्यशाली
कहते
31-03-03
563—233-03-11