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Wednesday, April 6, 2011

दिल तुम्हारा गवाही ना देगा

जानता हूँ
कहीं मिल गया तो
पहचानोगे नहीं मुझे
नज़रें बचा कर
निकल जाओगे वहाँ से
गर नफरत इतनी तो
आँख से आँख मिलाना
फिर साफ़ साफ़ कहना
नहीं चाहते तुम हमको
दिल तुम्हारा गवाही ना देगा
दिल चाह कर भी नफरत का
इज़हार ना करने देगा
निरंतर गरूर ने
तुम्हें हमसे दूर किया
अब छोड़ दो उसे
माफ़ हमने किया तुम को
तुम भी अब हमें माफ़ कर दो
फिर से साथ चलने का
इरादा कर लो
06-04-2011
619-52 -04-11

शुक्र है,तुमने नाम से तो पहचाना मुझे



शुक्र है
तुमने नाम से तो
पहचाना मुझे
हम तो सोचते थे
नाम लेने वाले से भी
रिश्ता ना रखेंगे आप
दिखाने के लिए ही सही
लबों से नाम तो लिया
कानों से सुन कर
इजहार नफरत का
ना किया
हमने इस बात पर ही
माफ़ तुम को किया
गिला,शिकवा दिल से
निकाल दिया
निरंतर अब शहर में
उनको ढूँढेंगे
जो नाम मेरा तुम्हारे
सामने लेते
उन से हाल तुम्हारा
जान कर
सुकून दिल को
देंगे
06-04-2011
618-51 -04-11
 

कैसे बताएँगे ,चाहते हैं हमको




वो समझते हाल दिल का हमसे छुपा
क्या उनके  दिल  में , हमें सब पता

उनका  नहीं  दिखना,  नज़रें  चुराना
निरंतर  फ़साना  दिल   का  कहता

डरते  हैं , गर  दिख  जायेंगे  कही
चेहरा  हाल - दिल  बयाँ करेगा

हकीकत  से  ज़माना  रूबरू   होगा 
सवालों   का   जवाब   देना  पडेगा

कैसे   बताएँगे , चाहते   हैं   हमको
ज़माने  के  डर  से  खामोश  रहते

किसी  तरह  छुप  छुप  कर  जीते
  अकेले   में  अश्क   बहाते   रहते   
06-04-2011
616-49 -04-11

ये ना समझना कि मोहब्बत की आग बुझ गयी


मेरी खामोशी का
मतलब
ये ना समझना कि
मोहब्बत
की आग बुझ गयी
ये बात जुदा है कि
अब उसे
दबाना सीख लिया
अब दोस्ती ग़मों से
कर ली
साथ उनके जीना
सीख लिया
अश्क भी आते हैं ,
मुझे रुलाते हैं
वो भी निरंतर उनके
गम में
आने से पहले ही
सूख जाते हैं
06-04-2011
615-48 -04-11

लोग कहते हैं,आज मौसम खराब है

लोग कहते हैं  
आज मौसम खराब है
निरंतर
गर्मी से परेशान हैं
पसीने
से बदन जल रहा
प्यास
से गला सूख रहा
मगर
हमें मौसम भा गया 
ठंडक
से सुकून मिल रहा
ना गला सूख रहा
ना पसीना आ  रहा
दिल बाग़ बाग़ हो रहा
आज उनका ख़त आया
हमें घर बुलाया  
  
06-04-2011
614-47 -04-11