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Tuesday, July 5, 2011

छू जाएँ दिल को ऐसे लोग कहाँ ?

छू जाएँ दिल को ऐसे लोग कहाँ ?
जिस को  मिले ,मुझे  भी  मिला दे
अरसे  से पल  रही हसरत मिटा दे
निरंतर    दुनिया  में   ढूंढा  जिन्हें
ऐसी  शख्शियतों से  रूबरू  करा दे
दूसरों के  दर्द  में अश्क  बहाते  हो
खुद  दर्द  सह  कर  भी   हँसते हों
खुदा  ऐसे  एक इंसान से  मिला दे
मेरे  जैसे  लोग  लाखों  दुनिया  में
कोई   तो  अलग   होगा   मुझ   से
उस  एक  शख्श  से   ही  मिला दे
सब्र   बहुत  रखी  मैंने  अब  तक
कम से कम उसका नाम तो बता दे
05-07-2011
1140-24-07-11

Wednesday, April 6, 2011

ये ना समझना कि मोहब्बत की आग बुझ गयी


मेरी खामोशी का
मतलब
ये ना समझना कि
मोहब्बत
की आग बुझ गयी
ये बात जुदा है कि
अब उसे
दबाना सीख लिया
अब दोस्ती ग़मों से
कर ली
साथ उनके जीना
सीख लिया
अश्क भी आते हैं ,
मुझे रुलाते हैं
वो भी निरंतर उनके
गम में
आने से पहले ही
सूख जाते हैं
06-04-2011
615-48 -04-11

Thursday, March 24, 2011

कभी ना पूछना,क्यूं लिखते हो तुम




कभी ना पूछना
क्यूं लिखते हो तुम
हाल-ऐ-दिल क्यूं बताते
हो तुम
मौक़ा देता हूँ उनको
जो नहीं जानते
मुझको
समझते खंजर जेब में
रखता
दिल प्यार से भरा मेरा
निरंतर महकता रहता
दर्द मुझे भी होता
चुपचाप सहता रहता
ऊपर से हंसता
अन्दर से रोता
किसी तरह जीता
रहता
24-03-03
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
496—166-03-11

कब कहा मुझे,उन्हें हमसफ़र बनाना



कब कहा
मुझे,उन्हें हमसफ़र
बनाना
ये भी तो ना कहा
कभी उन्हें ख़्वाबों में
ना देखना
कभी ख्यालों में ना
रखना
ख्वाब, ख्याल तो
घर मेरा
कोई आए तो
उसे क्यूं रोकना
दिल लग जाए,
तो उसे क्यूं टोकना ?
निरंतर दिल किस के
काबू में रहा
जिसका हो गया,
उसका हो गया
किसी के रोकने से
कब रुका
एक बार मचल गया तो
मचलता रहता
24-03-03
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर4
495—165-03-11
 

तुम्हारी हर चिट्ठी,जला कर राख कर देता



तुम्हारी हर चिट्ठी
जला कर राख कर देता
हाथ किसी के कागज़ का
कीमती टुकडा ना
पड़ जाए,
कीमत उसकी कम 
ना हो जाए
नज़र किसी की
तुम्हारे ख्यालों को ना
लग जाए
नया फ़साना पैदा ना
हो जाए
उसके हर लफ्ज को
ज़माने की नज़रों से
छुपा कर रखता
निरंतर
पास मेरे महफूज़ रहे
सुकून मुझको देता रहे
इस लिए जहन में
जज्ब रखता
दिल में छुपा कर
रखता
24-03-03
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर4
494—164-03-11