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Sunday, August 26, 2012

ज़िन्दगी में उजाले के साथ अन्धेरा भी ज़रूरी



ज़िन्दगी में
उजाले के साथ
अन्धेरा भी ज़रूरी
हंसने के
साथ रोना भी ज़रूरी
दोस्त के साथ
दुश्मन भी ज़रूरी
ना हो गर ये सब साथ में
ना कोई
परवाह करेगा खुदा की
ना ही करेगा कद्र
ज़िन्दगी की
बन जाएगा हैवान
समझने लगेगा
खुद को
खुदा के बराबर
26-08-2012
701-61-08-12

Tuesday, July 24, 2012

दिल-ओ-दिमाग का अन्धेरा


दिल-ओ-दिमाग का
अन्धेरा
रात के अँधेरे से ज्यादा
गहरा होता
रात के अँधेरे के बाद
उजाला आता
दिल-ओ-दिमाग का
अन्धेरा
कहर बरपाता
रिश्तों को तोड़ता
दोस्त को दुश्मन बनाता
मन का चैन छीनता
जीने की इच्छा कम
करता
जितना खुद को परेशान
करता
उतना ही दूसरों को भी
करता
निरंतर शूल सा चुभता
रहता
विचारों को
तहस नहस करता
जीवन से खुशियाँ छीनता
दिल-ओ-दिमाग का
अन्धेरा
रात के अँधेरे से ज्यादा
गहरा होता
24-07-2012
622-19-07-12

Tuesday, November 29, 2011

क्षणिकाएं -8


बड़े अरमानों से
बड़े अरमानों से
हमने उन्हें फूल
भेंट किये
भोलेपन से वो
पूछने लगे
कहाँ से खरीदे ?
हमें भी किसी
ख़ास को देने हैं
बहुत शिद्दत से
बताने लगे
****
अन्धेरा
लोग घरों को रोशन
करते हैं
दिल-ओ-दिमाग में
अन्धेरा रखते हैं
****
मैं चाहूँ तो हो जाए
मैं चाहूँ हो जाए
कोई और चाहे
तो क्यों हो जाए
****
ज्यादा देने के लिए
ज्यादा देने के लिए
कम लेना सीखो
जो मिले उसे
खुशी से कबूल
कर लो
****
कुर्सी के लिए
सब कुर्सी के लिए
लड़ते
उससे कोई नहीं
पूछता
उस पर बैठने वाला
कैसा होना चाहिए
****
प्रेम की परिणीति
प्रेमियों के
प्रेम की परिणीति
प्रेमी प्रेमिका
दोनों की बेचैनी
****
देता इश्वर है
देता इश्वर है
खाते,पचाते,
भोगते,हम हैं
फिर कहते
हमारा है
****
सहानभूती
सहानभूती के
दो शब्द दिल को
राहत देते हैं
उसमें भी लोग
कंजूसी करते हैं
****
दुविधा
दुविधा मैं पैदा हुआ
दुविधा में जीता रहा
दुविधा में मर गया
करूँ ना करूँ
के जाल में फंसा रहा
****
सामंजस्य बिठाओ 
सामंजस्य बिठाओ 
नहीं तो विद्रोह करो
या फिर सहन करो
29-11-2011
1826-91-11-11

Monday, November 14, 2011

उजाला


हम घर
में
चिराग नहीं
जलाते
अन्धेरा
होने पर
उन्हें अपने
घर
बुला लेते
हैं
14-11-2011
1789-60-11-11

Thursday, July 14, 2011

अन्धेरा

सूर्य की रोशनी निरंतर
चकाचोंध करती रही
हर रोशनी
उस के सामने फीकी
लगती रही 
रात कभी ना भायी
उम्र के साथ सम्हल
गया हूँ 
अब रात के अँधेरे की
शिकायत नहीं करता
मुझे पता है
अन्धेरा दिन पर दिन
बढेगा
एक दिन ऐसा आयेगा
जब केवल अन्धेरा
होगा
14-07-2011
1180-63-07-11