ज़िन्दगी में
उजाले के साथ
अन्धेरा भी
ज़रूरी
हंसने के
साथ रोना भी
ज़रूरी
दोस्त के साथ
दुश्मन भी ज़रूरी
ना हो गर ये
सब साथ में
ना कोई
परवाह करेगा
खुदा की
ना ही करेगा
कद्र
ज़िन्दगी की
बन जाएगा हैवान
समझने लगेगा
खुद को
खुदा के बराबर
26-08-2012
701-61-08-12
दिल-ओ-दिमाग
का
अन्धेरा
रात के अँधेरे
से ज्यादा
गहरा होता
रात के अँधेरे
के बाद
उजाला आता
दिल-ओ-दिमाग
का
अन्धेरा
कहर बरपाता
रिश्तों को
तोड़ता
दोस्त को दुश्मन
बनाता
मन का चैन छीनता
जीने की इच्छा
कम
करता
जितना खुद को
परेशान
करता
उतना ही दूसरों
को भी
करता
निरंतर शूल
सा चुभता
रहता
विचारों को
तहस नहस करता
जीवन से खुशियाँ
छीनता
दिल-ओ-दिमाग
का
अन्धेरा
रात के अँधेरे
से ज्यादा
गहरा होता
24-07-2012
622-19-07-12
बड़े अरमानों से
बड़े अरमानों से
हमने उन्हें फूल
भेंट किये
भोलेपन से वो
पूछने लगे
कहाँ से खरीदे ?
हमें भी किसी
ख़ास को देने हैं
बहुत शिद्दत से
बताने लगे
****
अन्धेरा
लोग घरों को रोशन
करते हैं
दिल-ओ-दिमाग में
अन्धेरा रखते हैं
****
मैं चाहूँ तो हो जाए
मैं चाहूँ हो जाए
कोई और चाहे
तो क्यों हो जाए
****
ज्यादा देने के लिए
ज्यादा देने के लिए
कम लेना सीखो
जो मिले उसे
खुशी से कबूल
कर लो
****
कुर्सी के लिए
सब कुर्सी के लिए
लड़ते
उससे कोई नहीं
पूछता
उस पर बैठने वाला
कैसा होना चाहिए
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प्रेम की परिणीति
प्रेमियों के
प्रेम की परिणीति
प्रेमी प्रेमिका
दोनों की बेचैनी
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देता इश्वर है
देता इश्वर है
खाते,पचाते,
भोगते,हम हैं
फिर कहते
हमारा है
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सहानभूती
सहानभूती के
दो शब्द दिल को
राहत देते हैं
उसमें भी लोग
कंजूसी करते हैं
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दुविधा
दुविधा मैं पैदा हुआ
दुविधा में जीता रहा
दुविधा में मर गया
करूँ ना करूँ
के जाल में फंसा रहा
****
सामंजस्य बिठाओ
सामंजस्य बिठाओ
नहीं तो विद्रोह करो
या फिर सहन करो
29-11-2011
1826-91-11-11
हम घर
में
चिराग नहीं
जलाते
अन्धेरा
होने पर
उन्हें अपने
घर
बुला लेते
हैं
14-11-2011
1789-60-11-11
सूर्य की रोशनी निरंतर
चकाचोंध करती रही
हर रोशनी
उस के सामने फीकी
लगती रही
रात कभी ना भायी
उम्र के साथ सम्हल
गया हूँ
अब रात के अँधेरे की
शिकायत नहीं करता
मुझे पता है
अन्धेरा दिन पर दिन
बढेगा
एक दिन ऐसा आयेगा
जब केवल अन्धेरा
होगा
14-07-2011
1180-63-07-11