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Saturday, March 3, 2012

हास्य कविता-हँसमुखजी ने खेली होली,मस्ती में खाली भांग की गोली

हँसमुखजी ने खेली होली
मस्ती में 
खाली भांग  की गोली
भांग ने 
दिखाया अपना रंग
हँसमुखजी  ने
लिया हाथ में चंग
मचाने लगे हुडदंग 
बीबी को 
आंटीजी कह दिया
साली को 
कह दिया जानेमन
बीबी का 
हाथ झटक दिया
साली को 
गले लगा लिया
बीबी साली एक 
हो गयी
चढ़ायी दोनों ने
त्योरियां
साली ने पकडे हाथ
बीबी ने  पकड़ी टांग
ठन्डे पानी के हौद में
हँसमुखजी को फैंक दिया
कमर में लगी चोट
जोश पड गया ठंडा
नशा  हो गया मंद
पड गया रंग में भंग
लग गयी उनको ठण्ड
ऊपर से बीबी ने
कर दिया खाना बंद
फिर लगवाए 
गिन गिन कर पूरे 
ढेड सौ डंड
हँसमुखजी ने खायी 
सौगंध
अब होली पर नहीं 
खायेंगे
जीवन में कभी भंग
03-03-2012
288-23-03-12

Wednesday, February 29, 2012

हास्य कविता-पता थोड़े ही था जूते एक नंबर छोटे निकलेंगे


हँसमुखजी
पत्नी के साथ
मंदिर से निकले
पत्नी से बोले
चलने में दिक्कत हो
रही है
जूते काट रहे हैं
पत्नी बोली
बाज़ार से चप्पल
खरीद लो
हँसमुखजी बोले
सूट के साथ चप्पल
अच्छी नहीं लगेगी
पत्नी ने जवाब दिया
तो फिर सैंडल खरीद लो
सैंडल मुझे पसंद नहीं है
पत्नी झल्लायी
मंदिर आये तब तो ठीक थे
अचानक क्या हो गया
हँसमुखजी बोले
कोई ख़ास बात नहीं
जूते पुराने हो गए थे
अपने मैंने मंदिर में
छोड़ दिए
दूसरे के पहन लिए
पता थोड़े ही था
एक नंबर छोटे
निकलेंगे
29-02-2012
265-176-02-12


Monday, February 27, 2012

आंटी या अम्माजी (हास्य कविता)

हमने उन्हें बहन
कह दिया
वो नाराज़ हो गए
कहने लगे
बहन नहीं कुछ और कहो
हमने समझा हमें
चाहने लगे हैं
हमने जाने मन कह दिया
उन्होंने ज़न्नाटेदार थप्पड़
हमारे गाल पर जड़ दिया
आग बबूला हो कर
कहने लगे
तुम्हारा माँ की उम्र की हूँ
हमने तो सोचा था
आंटी या अम्माजी
कहोगे
27-02-2012
255-166-02-12

Saturday, February 25, 2012

हास्य कविता-हँसमुखजी की कुछ ना कुछ कहने की आदत

हँसमुखजी की
कुछ ना कुछ कहने की
आदत का सामना एक दिन
मुझको भी करना पडा
मुझ से बोले भाई निरंतर
क्या आप निरंतर खाते हैं
निरंतर बोलते हैं ,निरंतर सोते हैं
निरंतर जागते हैं
जो आपने अपना नाम
निरंतर रख लिया
फिर भी अगर रखना ही था तो
उसकी जगह लगातार,बिना रुके ,
कनटीन्यूअस (continuous)
भी तो रख सकते थे
उनके बेहूदा सवाल पर
मेरा पारा चढ़ गया
उनकी बे
सिर पैर की
बात करने की
आदत छुडाने का निर्णय लिया
मैंने कहा
मैं निरंतर सोचता हूँ
निरंतर हँसता हूँ
निरंतर आपके बेहूदा
कारनामों और छिछोरी आदत के
बारे में लिख कर पाठकों को
बताता हूँ
ताकि सब आपको पहचान लें
आपकी चाल से आप को
ही मात दें
इसलिए अपना नाम निरंतर रखा है
उस दिन के बाद से
हँसमुखजी सबको सलाह देते हैं
किसी से भी बेसिर पैर की
बात नहीं कहनी चाहिए
केवल कहने के लिए भी
कोई बात नहीं कहनी
चाहिए
25-02-2012
247-158-02-12

Friday, February 24, 2012

हास्य कविता-हँसमुखजी बचपन से बड़े भोले थे

24-02-2012
235-146-02-12

Tuesday, February 21, 2012

हास्य कविता-थोड़ा सा शर्मीला हूँ

 तुमने पूँछा किसी से
क्या तुमसे मोहब्बत
करता हूँ
ये बहम नहीं तुम्हारा
हकीकत है
बंद आँखों से भी
तुम्हें देखता हूँ
जब निकलती हो
घर से बाहर
कनखियों से देखता हूँ
सुबह-ओ-शाम
तुम्हारे नाम की
माला भी जपता हूँ
क्या करूँ मजबूर हूँ 
थोड़ा सा शर्मीला हूँ
सामने कुछ कहने में
झिझकता हूँ
कभी कभी हकलाता हूँ
तुम्हारी मार से
घबराता हूँ
इसीलिए लिख कर
बता रहा हूँ
21-02-2012
211-122-02-12

Monday, February 20, 2012

हास्य कविता-हँसमुखजी का वक़्त बेवक्त का मज़ाक

हँसमुखजी वक़्त बेवक्त
हर किसी का मज़ाक
बनाने की आदत के
शिकार थे
किसी की भावनाओं का
ख्याल नहीं रखते थे
मित्र नया सूट
पहन कर आया तो
कई लोगों के बीच
कह दिया
सूट कितने रूपये रोज़ में
किराए पर लाये हो
मित्र बड़े शान से
प्रतियोगिता में जीती हुयी
शील्ड दिखा रहा था
फ़ौरन बोले
शील्ड कितने में खरीदी
सब के बीच
उसे शर्मसार कर दिया
मित्र ने उन्हें
सबक सिखाने का
निर्णय लिया
एक दिन हँसमुखजी को
पत्नी बच्चों के साथ
देख लिया
पास जा कर बोला
भाभीजी को पहचान लिया
बच्चों के
बाप का क्या नाम है
आपसे तो शक्ल नहीं
मिलती
हँसमुखजी की सारी
शानपत धरी की धरी
रह गयी
कसम खा ली अब
किसी का  मज़ाक नहीं
उड़ायेंगे
अब कहीं भी बीबी
बच्चों के साथ जाते हैं
तो कोई पूंछता है
उससे पहले ही बोल देते हैं
शक्ल तो नहीं मिलती
पर बच्चे मेरे हैं
लगे हाथ किसी का
मज़ाक नहीं उड़ाने की
नसीहत भी दे देते हैं
20-02-2012
207-118-02-12

हास्य कविता-हँसमुखजी के कुत्ते ने छुट भैया नेता को काट लिया

हँसमुखजी के कुत्ते ने
छुट भैया नेता को
काट लिया
नेता हँसमुखजी पर
गुर्राया
कैसा जाहिल कुता है
तुम्हारा ?
किसी इंसान को नहीं
छोड़ता
हँसमुखजी बोले
ऐसा मत कहो
मेरा कुता
बहुत समझदार है
केवल जाहिलों को
काटता है
छुट भैया नेता झेंप गया
फ़ौरन बोला
मेरा मतलब कम से कम
नेताओं को तो नहीं काटे
हँसमुखजी बोले ठीक
कहते हो
जो सब को काटे
उसको तो नहीं
काटना चाहिए
कम से कम
बिरादरी वालों का तो
ख्याल रखना चाहिए
20-02-2012
203-114-02-12
(विशुद्ध हास्य कविता है ,
किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना उद्देश्य नहीं है,
फिर भी किसी को अच्छा नहीं लगे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )

Tuesday, February 14, 2012

वैलनटाइन डे क्या ख़ाक मनाएंगे

मेरे मित्रों ने पूछा
मुझसे
भाई निरंतर
वैलनटाइन डे कैसे
मनाओगे?
क्या भाभीजी को
बगीचे में घुमाओगे
नदी किनारे
ठंडी हवा खिलाओगे
या बाहों में बाहें डाल
गाना गाओगे
मैं बोला
अरे मूर्खों हम पहले ही
एक दूजे में खोये हुए हैं
हमारे दिल से
दिल मिले हुए हैं
वैलनटाइन डे
क्या ख़ाक मनाएंगे
वैलनटाइन डे
तो वो मनाते हैं
जो प्रेम के भूखे हैं
जिनके दिल आपस में
नहीं मिलते
शायद इसी बहाने
मिल जाएँ
वैलनटाइन डे उन्हें
हमेशा याद आये
14-02-2012
167-78-02-12