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Friday, February 10, 2012

क्षणिकाएं -13

उम्मीद
लोगों से उम्मीद
नहीं करता हूँ
नफरत का सामान
इकट्ठा करने का
शौक नहीं रखता हूँ
*************
खुशी की चाह
खुशी की
चाह रखने से पहले
खुश रहना ज़रूरी
सोचने का तरीका
बदलना ज़रूरी
*************
क्रिकेट
जीत गए तो
सर पर उठा लो
हार गए तो
गालियों से नवाजो
क्रिकेट के खेल को
केवल खेल समझो
हार जीत को
ज़ज्बात से मत
जोड़ो
*************
जीत गए तो
जीत गए तो
बहुत मेहनत करी
हार गए तो मेहनत
नहीं करी होगी
*************
हार कर जीतना
हार कर जीतना
लगन
मेहनत से संभव
सदा जीतते रहना
अधिक कठिन
************
दुखी-सुखी
दुखी मन
सुखी रहना
चाहता
सुखी मन
भी सुखी रहना
चाहता
********
खुदगर्जी
 सब मेरी प्रशंसा करें
जो ना करें
मैं उस से नफरत करूँ
मैं सबसे आगे रहूँ
मुझ से आगे कोई
ना रहे
10-02-2012
144-55-02-12

Tuesday, March 29, 2011

क्रिकेट के जुनून में,खुद को भूल गए


 मायूस
मायूसी भूल गए
बीमार
बीमारी भूल गए
निरंतर चिंता
रोटी की करते थे
क्रिकेट के चक्कर में
रोटी भूल गए
देश दोस्ती की बात
करने लगे
अपनी दुश्मनी भूल गए
साथ खा रहे,साथ पी रहे
क्रिकेट के जुनून में
खुद को भूल गए
सिर्फ क्रिकेट जहन में
बाकी सब कुछ
भूल गए
29-03-03
547—217-03-11