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Tuesday, March 19, 2013

हार कर भी जीत जाऊंगा



मैं इतना बलशाली नहीं
तुमसे लोहा ले सकूँ
पर इतना निर्बल भी नहीं
तुम्हारे
निरंकुश दुर्व्यवहार का
प्रतिरोध ना कर सकूँ
मैं हार भले ही जाऊं
पर हार मानूंगा नहीं
सिद्ध कर दूंगा
बलवान से निर्बल भी
लड़ सकता है
दुर्व्यवहार का प्रतिरोध
कर सकता है
मैं हार कर भी जीत
जाऊंगा
हर निर्बल को
हिम्मत से भर दूंगा
उसके मन से
बल के आगे झुकने का
भय हटा दूंगा
उसे आत्मविश्वास का
मन्त्र दे पाऊंगा
36-36-18-01-2013
बलवान,निर्बल,हिम्मत,दुर्व्यवहार,आत्मविश्वास, ,हार,जीत
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

Wednesday, November 28, 2012

हार का ठीकरा



अपनी हार का ठीकरा
दूसरों पर फोड़ते हो तुम
जीत का सेहरा खुद के
सर पर बांधते हो तुम
क्यों सच से
दूर भागते हो तुम
खुद को धोखा देते हो तुम
जीतना ही चाहते हो तो
तो पहले
अपने झूठ को जीत लो
सच कहना सीख लो
नहीं तो ज़िन्दगी भर
हार का ठीकरा दूसरों के
सर पर फोड़ते रहोगे तुम
ज़िन्दगी भर
हारते रहोगे तुम
निराशा में
जीते रहोगे तुम
रोते रोते संसार से
चले जाओगे तुम 
876-60-28-11-2012
हार,जीत,निराशा,जीवन

Tuesday, August 21, 2012

अहम् पर कविता -हार किसी को मंज़ूर नहीं



चार दिनों का
सब्र भी नहीं किसी को
पल पल भारी लगता
जीवन का
जब अहम् हो गया
जान से प्यारा 
क्या करना फिर
दोस्त और दोस्ती का
जो भी
रह गया होड़ में पीछे
वही हारा कहलाता
हार किसी को मंज़ूर नहीं
क्या अपना क्या पराया
प्यार मोहब्बत गए भाड़ में
हर इंसान
फिर दुश्मन लगता
21-08-2012
673-33-08-12,

Monday, August 13, 2012

ज़िन्दगी को समझने के लिए


ज़िन्दगी को
समझने के लिए
खुशी के साथ गम भी
ज़रूरी है
हँसी के साथ आंसू भी
ज़रूरी है
जीत के साथ हार भी
ज़रूरी है
क्रोध के साथ प्यार भी
ज़रूरी है
हर जान को
एक जान का साथ भी
ज़रूरी है
इंसान बन कर रहना भी
ज़रूरी है
ऊपर वाले की दुआ भी
ज़रूरी है
जिसने भी समझ लिया
सच ज़िन्दगी का
उसने ही समझ लिया
ज़िन्दगी को
उसको फ़िक्र करना फिर
ज़रूरी नहीं है
13-08-2012
656-16-08-12

Friday, August 3, 2012

ना तुम्हारी जीत ज़रूरी ,ना मेरी हार ज़रूरी



ना तुम्हारी जीत ज़रूरी
ना मेरी हार ज़रूरी
दिलों में नज़दीकी ज़रूरी
मैं हार भी जाऊं
पर दिल से नहीं लगाऊँ
तुम जीत भी जाओ
गर सर पर ना चढाओ
अहम् से ना भर जाओ
दिल आपस में वैसे ही
मिलते रहेंगे
ना इक दूजे से यकीन
उठेगा
ना दिलों में फासला बढेगा
मुझे हार में भी जीत का
मज़ा मिलेगा
तुम जीत कर भी
दिल हार जाओगे
03-08-2012
649-09-08-12

Tuesday, July 17, 2012

मंजिल है अभी दूर है ,पड़ाव नहीं डालना है


इस जीत को
जीत नहीं मानना
ख्यालों को
मिला है मुकाम
इतना सा समझना
मंजिल है अभी दूर है
पड़ाव नहीं डालना
आ जाए
सफ़र में रुकावट  
तो हार नहीं मानना
हिम्मत होंसले से
निरंतर चलते रहना
बस इतना सा
जानना
17-07-2012
608-05-07-12

Friday, February 10, 2012

क्षणिकाएं -13

उम्मीद
लोगों से उम्मीद
नहीं करता हूँ
नफरत का सामान
इकट्ठा करने का
शौक नहीं रखता हूँ
*************
खुशी की चाह
खुशी की
चाह रखने से पहले
खुश रहना ज़रूरी
सोचने का तरीका
बदलना ज़रूरी
*************
क्रिकेट
जीत गए तो
सर पर उठा लो
हार गए तो
गालियों से नवाजो
क्रिकेट के खेल को
केवल खेल समझो
हार जीत को
ज़ज्बात से मत
जोड़ो
*************
जीत गए तो
जीत गए तो
बहुत मेहनत करी
हार गए तो मेहनत
नहीं करी होगी
*************
हार कर जीतना
हार कर जीतना
लगन
मेहनत से संभव
सदा जीतते रहना
अधिक कठिन
************
दुखी-सुखी
दुखी मन
सुखी रहना
चाहता
सुखी मन
भी सुखी रहना
चाहता
********
खुदगर्जी
 सब मेरी प्रशंसा करें
जो ना करें
मैं उस से नफरत करूँ
मैं सबसे आगे रहूँ
मुझ से आगे कोई
ना रहे
10-02-2012
144-55-02-12

Sunday, July 24, 2011

ज़िन्दगी फ़ुटबाल का खेल

ज़िन्दगी

फ़ुटबाल का खेल

गेंद कभी इधर

कभी उधर रहती

कभी चोट खाते

कभी

ज़मीन पर गिरते

कभी गेंद गोल में

कभी गोल के बाहर

रहती

कभी विपक्षी भारी

कभी हम भारी

निरंतर

गम और खुशी साथ

चलती रहती

ध्यान

जिसका गेंद पर

वह जीतता

ध्यान हटाने वाला

निरंतर हारता

जीत के लिए खेलना

ज़रूरी

हार जीत खेलने से

होती

बिना खेले ज़िन्दगी

अधूरी रहती

24-07-2011

1222-102-07-11