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Thursday, March 14, 2013

बार बार समझाता हूँ



बार बार समझाता हूँ
बार बार पूछता हूँ
क्यों क्रोध करते हो
बात बात में चिढते हो
क्या धैर्य धीरज भूल गए
सहनशीलता से भी
रुष्ट हो गए
जब पहले कभी
क्रोध से समस्याओं का
समाधान नहीं हुआ
अब कैसे हो जाएगा
तुम्हारा खून अवश्य जलेगा
रिश्तों में खटास
मन में तनाव भी बढेगा
तुम कहोगे
बार बार एक ही बात
क्यों दोहराता हूँ
मैं भी जानता हूँ
क्रोध घातक होता है
पर क्या करूँ
आदत से मजबूर हूँ
मैं भी कह देता हूँ
अग्रज होने के कारण
तुम्हें समझाना
मेरा कर्तव्य है
जब तक कर्तव्य अधूरा है
हिम्मत नहीं हारना
मेरी आदत है
मैं भी आदत से मजबूर हूँ
26-26-14-01-2013    
क्रोध, कर्तव्य, आदत
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

Saturday, December 15, 2012

कभी कभी मैं भी हैवान बन जाता हूँ



कभी कभी मैं भी
हैवान बन जाता हूँ
लोगों के तीरों का
जवाब
तीरों से दे देता हूँ
बेसब्री की गर्मी से
खुद
मन के गुलशन को
झुलसा देता हूँ
उनसे ज्यादा ज़ख्म
खुद को देता हूँ
जिन्हें आदत है
नफरत से जीने की
उनके जाल में फंस
जाता हूँ
कभी कभी मैं भी
हैवान बन जाता हूँ
935-54-15-12-2012
बेसब्री,नफरत,क्रोध,जीवन

Monday, August 13, 2012

ज़िन्दगी को समझने के लिए


ज़िन्दगी को
समझने के लिए
खुशी के साथ गम भी
ज़रूरी है
हँसी के साथ आंसू भी
ज़रूरी है
जीत के साथ हार भी
ज़रूरी है
क्रोध के साथ प्यार भी
ज़रूरी है
हर जान को
एक जान का साथ भी
ज़रूरी है
इंसान बन कर रहना भी
ज़रूरी है
ऊपर वाले की दुआ भी
ज़रूरी है
जिसने भी समझ लिया
सच ज़िन्दगी का
उसने ही समझ लिया
ज़िन्दगी को
उसको फ़िक्र करना फिर
ज़रूरी नहीं है
13-08-2012
656-16-08-12

Monday, June 25, 2012

कौन कहता है?, आग पानी का साथ नहीं हो सकता


कौन कहता है ?
आग पानी का साथ
नहीं हो सकता
मैं सबूत हूँ
नफरत भरे रिश्तों की
आग में भी जीवित रहा
समस्याओं की कसौटी पर
खरा उतरता रहा
स्वाभिमान की आंच में
झुलसा अवश्य
पर सहन शीलता से
उस पर पार पाता रहा
नफरत के गर्म सूरज पर
सब्र की ठंडक से
विजय पाता रहा
भावनाओं की आग को
भभकने नहीं दिया
हिम्मत के पानी से
उसे बुझाता रहा
कौन कहता है ?
आग पानी का साथ
नहीं हो सकता
25-06-2012
593-43-06-12

Tuesday, June 5, 2012

खाई है चोट अगर



खाई है चोट अगर
तो रोते क्यूं हो
फिर ना भुगतो
दोबारा
कुछ ऐसा करो
जहन के दरवाज़े
खुले रखो
खुद भी अन्दर झाँक
कर देख लो
क्या किया तुमने
ये भी जान लो
भूल अपनी सुधार लो
रहो चौकन्ना सदा
ना उलझो बातों में
ना बनाओ फ़साना
हर छोटी बात का
सब्र,संयम से काम लो
क्रोध पर काबू करो
हो सके जहाँ तक
मुसीबत से पल्ला
झाड लो
05-06-2012
572-22-06-12

हर हाल में संतुष्ट रहते

गोधुली वेला
मैं गाँव से शहर की
ओर
गाँव बैलों का रेवड़
धूल उडाता गाँव की ओर
अग्रसर
धूल से सांस लेना
दूभर होने लगा
गाँव बैलों पर क्रोध
आने लगा
मन ही मन
 उन्हें कोसने लगा
क्रोध शांत हुआ
मन में विचार आया
गाय बैलों को भी
धूल कष्ट देती होगी
जब सड़क ही धूल भरी
तो धूल भी उडेगी
वो ना तो क्रोध करते
ना ही
कभी शिकायत करते
जो भी,
जैसा भी मिलता उन्हें
सहर्ष स्वीकार करते
हर हाल में संतुष्ट रहते
05-06-2012
569-19-06-12

Wednesday, May 2, 2012

क्रोध पर कविता -मैं नहीं कहता तुम मेरी मानो



मैं नहीं कहता तुम
मेरी मानो
पर ध्यान से सुन तो लो
मुझे प्रतीत होता है
तुम्हें क्रोध बहुत आता है
आवेश में
जो नहीं कहना चाहिए
वो भी कह देते हो
एक बार गहनता से सोचो
तुम ऐसा करते हो या नहीं
आत्म मंथन करो ,
उत्तर मिल जाएगा
यही बात अगर कोई दूसरा
तुम्हें कहे
कब? कहाँ कहेगा?,पता नहीं
स्थितियों,परिस्थितियों का
ध्यान नहीं रखेगा
क्या तुम्हें अच्छा लगेगा ?
हो सकता है
व्यक्तियों के समूह में
तुम्हारा मखौल उड़ाया जाए
व्यक्तिगत 
संबंधों में दरार पड़ जाए
बात झगडे तक बढ़ जाए 
क्यों नहीं खुद इस बात को
समझ लो
एक बड़ी विपत्ती को
छोटे से सुधार से बचा लो
समय रहते क्रोध पर
काबू कर लो
02-05-2012
490-05-05-12

Tuesday, March 6, 2012

जब भावनाओं का मनुष्य पर नियंत्रण हो जाता

जब भावनाओं का
मनुष्य पर नियंत्रण
हो जाता
मन और ह्रदय
आहत हो जाता
निराशा छाने लगती,
मन भटकने लगता
क्रोध अपना रूप
दिखाता 
कुछ कहने करने का
किसी से मिलने का
कुछ सुनने का 
कहीं जाने का
मन नहीं होता
ह्रदय दुःख में डूब
जाता
मन व्यथित हो जाता
एकांत
सहारा बन जाता
आत्म मंथन
आवश्यक हो जाता
आगे बढना है तो
अपमान को सहना
सीखना होता
जो किसी ने कहा,करा
उसे भूलना होता
06-03-2012
307-41-03-12

Saturday, February 11, 2012

दुनिया को बता देता हूँ

हार जाता हूँ
आपा खो देता हूँ
खुद को भूल
जाता हूँ
क्रोध के सामने
सर झुका देता हूँ
इश्वर को भूल
जाता हूँ
कमजोर हूँ
दुनिया को बता
देता हूँ

11-02-2012
145-56-02-12