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Tuesday, June 5, 2012

हर हाल में संतुष्ट रहते

गोधुली वेला
मैं गाँव से शहर की
ओर
गाँव बैलों का रेवड़
धूल उडाता गाँव की ओर
अग्रसर
धूल से सांस लेना
दूभर होने लगा
गाँव बैलों पर क्रोध
आने लगा
मन ही मन
 उन्हें कोसने लगा
क्रोध शांत हुआ
मन में विचार आया
गाय बैलों को भी
धूल कष्ट देती होगी
जब सड़क ही धूल भरी
तो धूल भी उडेगी
वो ना तो क्रोध करते
ना ही
कभी शिकायत करते
जो भी,
जैसा भी मिलता उन्हें
सहर्ष स्वीकार करते
हर हाल में संतुष्ट रहते
05-06-2012
569-19-06-12

Thursday, December 22, 2011

उनको शिकायत है


यूँ मिले की
मुलाक़ात ना हो सकी
नज़रों से नज़रें मिली
होंठ भी काँपे
मगर बात ना हो सकी
दिल की दिल में
रह गयी
किश्ती किनारे से
दूर रह गयी
आँखें
 रोते रोते थक गयी
फिर भी
उनको शिकायत है
हमने
कोशिश नहीं करी
22-12-2011
1880-48-12

Saturday, November 5, 2011

तुम्हारी शरारत नहीं गयी


तुम्हारी
खुशबू दिल में बसी
तुम्हारी
बातें जहन में छायी
तुम जुदा हो गयी
मगर
तुम्हारी आदत नहीं गयी
मेरी तो
ज़िन्दगी तबाह हो गयी 
तुम्हारी
शिकायत नहीं गयी
पराया
समझ मुंह फिराती हो
निरंतर सताती हो
जी भर के रुलाती हो
रुस्वा होने के बाद भी
तुम्हारी
शरारत नहीं गयी
04-11-2011
1745-14-11-11

Thursday, August 11, 2011

वो कुछ कहते नहीं

वो कुछ कहते नहीं

बस तिरछी नज़र से

देख लेते हैं

अपनी शिकायत दर्ज

कर देते हैं

उनकी उस निगाह से

डरता हूँ

उनकी नाराजगी से

घबराता हूँ

कहीं दिल से ना लगा लें

रुस्वां ना हो जाएँ

मोहब्बत का

इंतकाल ना हो जाए

इसलिए निरंतर उन्हें

मना के रखता हूँ

आखिर दिल से जो

चाहता हूँ

10-08-2011

1333-55-08-11

Sunday, July 17, 2011

इक आवाज़ ने मुझे जगाया ,सुकून का फलसफा समझाया

दिल दर्द से रो
रहा था
ग़मों का सैलाब
आया था
इक आवाज़ ने मुझे
जगाया
सुकून का फलसफा
समझाया
परेशान ना हो
"मैं"को छोडो
"मैं"दर्द बढाता
क्या किसी ने कहा ?
क्या किसी ने करा?
जहन से निकालो
करने वाले करते रहेंगे
निरंतर 
आगे बढना तो
खुद पर काबू रखो
आसान नहीं सब
करना
ये भी जान लो
लाख चलन लोग
अपना भूलें
तुम अपना चलन
ना भूलो
खून का घूँट पी लो
सफलता और सुकून
लिखवा कर ले लो
17-07-2011
1195-75-07-11