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Monday, March 25, 2013

महाकाव्य लिखने के प्रयास में



महाकाव्य
लिखने के प्रयास में
चंद कवितायें तक
नहीं लिख सका
कलम तो थकी नहीं
हिम्मत का कागज़
जवाब दे गया
अपनों के
प्रतिकार से सहम कर
सदा की तरह चुप
हो गया
खुद के दुखों को
बाज़ार करने से
बच गया
45-45-24-01-2013
हिम्मत, प्रतिकार
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

Tuesday, March 19, 2013

हार कर भी जीत जाऊंगा



मैं इतना बलशाली नहीं
तुमसे लोहा ले सकूँ
पर इतना निर्बल भी नहीं
तुम्हारे
निरंकुश दुर्व्यवहार का
प्रतिरोध ना कर सकूँ
मैं हार भले ही जाऊं
पर हार मानूंगा नहीं
सिद्ध कर दूंगा
बलवान से निर्बल भी
लड़ सकता है
दुर्व्यवहार का प्रतिरोध
कर सकता है
मैं हार कर भी जीत
जाऊंगा
हर निर्बल को
हिम्मत से भर दूंगा
उसके मन से
बल के आगे झुकने का
भय हटा दूंगा
उसे आत्मविश्वास का
मन्त्र दे पाऊंगा
36-36-18-01-2013
बलवान,निर्बल,हिम्मत,दुर्व्यवहार,आत्मविश्वास, ,हार,जीत
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

Saturday, December 15, 2012

भोर जब चेहरा दिखाने लगी



भोर जब
चेहरा दिखाने लगी
रात मुंह छुपाने लगी
मन ही मन सोचने लगी
अब उसे जाना होगा
सूरज के ताप से
बचना होगा
फिर लौटना हो तो
सूरज अस्त ना हो
तब तक
धीरज और धैर्य
रखना होगा
हिम्मत होंसले से
काम लेना होगा
तब तक अविचल
शांती से बैठना होगा
941-60-15-12-2012
हिम्मत,होंसला,धीरज,धैर्य,जीवन,भोर,अविचल 

Tuesday, November 6, 2012

कभी कभी इतना कमज़ोर कैसे हो जाता हूँ


कभी कभी इतना कमज़ोर कैसे हो जाता हूँ
कभी कभी
इतना कमज़ोर
कैसे हो जाता हूँ
सच को झूठ
झूठ को सच मान
बैठता हूँ
पथ से भटक जाता हूँ
दुखों से घबरा कर
ह्रदय में डर बिठा लेता हूँ
संतुलन खो बैठता हूँ
क्या स्वयं से
विश्वास खो बैठा हूँ
शांत मन से सोचता हूँ
आत्ममंथन करता हूँ
नतीजे पर पहुंचता हूँ
फिर से
पथ पर आने के लिए
धीरज रखना होगा
सहनशील बनना होगा
होंसला रखना होगा
हिम्मत से लड़ना होगा
फिर से मुस्काराना होगा
स्वयं पर
विश्वास रखना होगा
832-16-06-11-2012
जीवन,सहनशील,धीरज,संतुलन,विश्वास,आत्ममंथन,हिम्मत

Tuesday, July 17, 2012

मंजिल है अभी दूर है ,पड़ाव नहीं डालना है


इस जीत को
जीत नहीं मानना
ख्यालों को
मिला है मुकाम
इतना सा समझना
मंजिल है अभी दूर है
पड़ाव नहीं डालना
आ जाए
सफ़र में रुकावट  
तो हार नहीं मानना
हिम्मत होंसले से
निरंतर चलते रहना
बस इतना सा
जानना
17-07-2012
608-05-07-12

Tuesday, June 5, 2012

राह मुश्किल हो गयी तो क्या चलना बंद कर दूं



राह
मुश्किल हो गयी
तो क्या चलना बंद
कर दूं
गिर गया तो क्या
उठूँ नहीं
जो चलेगा
वही तो गिरेगा
उठेगा नहीं तो
मंजिल पर
कैसे पहुंचेगा
मैं उनमें से नहीं
जो हार मन कर
बैठ जाते
मानता  हूँ दर्द भी
होता है
आँखों में आंसू भी
आते हैं
लड़ता रहा हूँ
ज़माने से
वक़्त के थपेड़ों से
हर बार अंत में
मैं ही हँसा हूँ
इस बार भी मैं ही
हँसूँगा
सदा की तरह
चलता रहूँगा
हिम्मत होंसले से
आगे बढ़ता रहूँगा
05-06-2012
568-18-06-12

Monday, April 30, 2012

उधार की सांसें


तुम्हारी परेशानी
हमसे
देखी नहीं जाती
साँसों की घुटन
समझ नहीं आती
सदा हंसने वाला
आज रो क्यों रहा है
अब बहुत हो चुका
ग़मों का दौर
आंसू पोंछो और
उठ जाओ
उधार की साँसों पर
जीना छोड़ दो
सब्र और हिम्मत से
काम लो
सिर्फ खुदा पर यकीन
रखो
27-04-2012
476-57-04-12

Wednesday, March 7, 2012

पहली बार जब चढ़ा था पर्वत पर कोई

 पहली बार
जब चढ़ा था
पर्वत पर कोई
हाथ उसके खाली थे
ना कोई औजार
ना कोई सहारा
ना हथियार
ना पैरों में जूते थे 
केवल लगन,होंसला
हिम्मत उसके साथ थे
आँखों में था सपना
पर्वत पर विजय पाने का
इन्ही के सहारे जीता था
उसने पर्वत को
क्यों फिर तुम घबराते हो
याद कर के उस महान
इंसान को
तुम भी जुट जाओ
उसकी हिम्मत
होंसले,लगन से
प्रेरित हो कर
आगे को बढ़ जाओ
तुम को भी एक दिन
सफलता मिलेगी
लक्ष्य तुम भी पाओगे
07-03-2012
315-49-03-12

Saturday, February 25, 2012

हमने भी ठान ली हार नहीं मानेंगे

रुकावटें आती 
रहीं हैं
रुकावटें आती 
रहेंगी
पथ से डिगाने की
कोशिशें होती 
रहेंगी 
हमने भी ठान ली
हार नहीं मानेंगे
सब्र नहीं खोएंगे
ज़ज्बा बनाए रखेंगे
हिम्मत से लड़ेंगे
थक भले ही जाएँ
मगर टूटेंगे नहीं 
पर्बतों को भी
झुका देंगे
ज़मीन की धूल
चटा देंगे
एक दिन मंजिल
को पा लेंगे  
25-02-2012
240-151-02-12