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Tuesday, July 17, 2012

यूँ चेहरे को हाथों से ना छुपाओ



यूँ चेहरे को
हाथों से ना छुपाओ
चाहने वालों का
दिल ना दह्लाओ
बस इतना सा बता दो
क्या शरमा रहे हो ?
या ज़माने की नज़रों से
बच रहे हो
हम खैर ख्वाह तुम्हारे
करते हैं दुआ खुदा से
तुम्हें नज़र ना लग जाए
कम से कम हमें तो 
चेहरा दिखाओ
यूँ चेहरे को हाथों से
ना छुपाओ
17-07-2012
607-04-07-12

Thursday, December 1, 2011

क्षणिकाएं -9


छुपाना
क्या क्या छुपाऊँ ?
कब तक छुपाऊँ?
किस किस से छुपाऊँ ?
झूठ का आवरण
ना हटाऊँ ?
मन की व्यथा बढाऊँ
चैन ना पाऊँ
****
मसले
अगर झगड़ने से
मसले हल हो जाते
लोग प्रेम का
नाम नहीं जानते
****
 ढूंढ रहे थे
हम उन्हें शहर की
गलियों में ढूंढ रहे थे
वो हमारे घर में बैठे
इंतज़ार कर रहे थे 
****
मोहब्बत का मतलब
वो निरंतर हमें
मुस्कारा कर देख रहे थे
इशारे से
अपने पास बुला रहे थे
हम शब्दकोष में
मोहब्बत का मतलब
ढूंढ रहे थे
****
वो हमें
शक से देखते हैं
कसूर उनका नहीं
वो मर्दों से घबराते हैं
उनके
किस्सों से डरते हैं
****
नाराजगी 
नाराजगी क्यों हुयी ?
समझ में नहीं आयी
नाराजगी हुयी
ये समझ आ गयी
****
रोते रहते
बीते समय को
याद कर
रोते रहते
वर्तमान ,
भविष्य दोनों को
नष्ट करते
****
हँसी- खुशी
जीवन

हँसी खुशी से गुजरे
अच्छा लगता
कष्ट में गुजरे
बोझ लगता

तन्हाई
अब तन्हाई से
दोस्ती हो गयी
ज़िन्दगी की हकीकत
समझ आ गयी
****
धोखा
जिसने बार बार
धोखा खाया
वो दहशत में जीता है
जिसने भुगता
वही समझता है
****
मसीहा
लोगों को
रास्ते से हटाते रहे
मसीहा बनने के
ख्वाब देखते रहे
01-12-2011
1833-98-11-11