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Wednesday, November 23, 2011

क्षणिकाएं -6


मजबूरी
करना नहीं चाहता
फिर भी करना पड़ता
*****
अंतर्द्वंद्व
करूँ तो
मन खुश नहीं होगा
नहीं करूँ तो
दूसरों को नाराज़
करना होगा
*****
विडंबना
मैं उन्हें बहन
समझता
वो मुझे शक से
देखती
*****
खुश
मैं रोज़ सपनों में
उनको देख लेता हूँ
थोड़ी देर खुश हो
लेता हूँ

*****
दिल में
दिल में बहुतों के लिए
कुछ होता रहता है
मजबूरी में
इंसान खामोश
रहता है

*****

बदकिस्मती
उनका
इंतज़ार करते करते
सो गया
जब तक जागा
वो आकर चले गए
23-11-2011
1810-81-11-11

Wednesday, October 26, 2011

कैसे दिल को समझाऊँ?


कैसे
दिल को समझाऊँ?
कैसे
 वक़्त को लौटाऊँ?
मुझ से मिलने से
पहले ही
वो किसी और के
हो चुके
बदकिस्मती मेरी
या उनकी कह नहीं
सकते
दिल से उन्हें चाहते
मजबूर
कर नहीं सकते
उनकी कमी निरंतर
खलेगी
क्यूं पहले ना मिले ?
टीस सदा मन में
रहेगी
उनकी याद अब जीने
ना देगी
25-10-2011
1709-116-10-11