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Sunday, June 3, 2012

कैसे कहूँ ?

कैसे कहूँ ?
तुम्हारे ख्याल भर से
दिल में कुछ होता है
हसरतें अंगडाई लेने
लगती
उम्मीदें मुंह उठाने
लगती
लफ्ज होठों की
दहलीज पर आ कर
रुक जाते हैं
ना सुनने के खौफ से
डर जाते हैं
मन की बात मन में ही
रह जाती है
हर लम्हा तडपाती है
कैसे कहूँ
तुम्हारे ख्याल भर से
क्या कुछ सहता हूँ
03-06-2012
560-80-05-12

Tuesday, March 13, 2012

चाहत की इन्तहां तो देखिये

कौन है
जिसने किसी से
दिल नहीं लगाया कभी
दिल धडका नहीं 
देख कर किसी को कभी
कुछ को मिल गयी
मंजिल
पहली मुलाक़ात में
कुछ को मिली बहुत
इंतज़ार के बाद
कुछ ऐसे भी जो बैठे हैं
हसरतों को दिल में
दबाये हुए अभी तक
कब होगी
मुलाक़ात साहिल से
कब पायेंगे
निजात दिल के दर्द से
उन्हें पता नहीं
पर उनकी चाहत की
इन्तहां तो देखिये
होंसला नहीं खोते हैं
इंतज़ार में
हर खूबसूरत चेहरे को
देख कर मुस्काराते हैं
नित नए ख्वाब बुनते हैं
13-03-2012
359-93-03-12

Wednesday, November 23, 2011

क्षणिकाएं -6


मजबूरी
करना नहीं चाहता
फिर भी करना पड़ता
*****
अंतर्द्वंद्व
करूँ तो
मन खुश नहीं होगा
नहीं करूँ तो
दूसरों को नाराज़
करना होगा
*****
विडंबना
मैं उन्हें बहन
समझता
वो मुझे शक से
देखती
*****
खुश
मैं रोज़ सपनों में
उनको देख लेता हूँ
थोड़ी देर खुश हो
लेता हूँ

*****
दिल में
दिल में बहुतों के लिए
कुछ होता रहता है
मजबूरी में
इंसान खामोश
रहता है

*****

बदकिस्मती
उनका
इंतज़ार करते करते
सो गया
जब तक जागा
वो आकर चले गए
23-11-2011
1810-81-11-11