कैसे कहूँ ?
तुम्हारे ख्याल भर से
दिल में कुछ होता है
हसरतें अंगडाई लेने
लगती
उम्मीदें मुंह उठाने
लगती
लफ्ज होठों की
दहलीज पर आ कर
रुक जाते हैं
ना सुनने के खौफ से
डर जाते हैं
मन की बात मन में ही
रह जाती है
हर लम्हा तडपाती है
कैसे कहूँ
तुम्हारे ख्याल भर से
क्या कुछ सहता हूँ
03-06-2012
560-80-05-12
कौन है
जिसने किसी से
दिल नहीं लगाया कभी
दिल धडका नहीं
देख कर किसी को कभी
कुछ को मिल गयी
मंजिल
पहली मुलाक़ात में
कुछ को मिली बहुत
इंतज़ार के बाद
कुछ ऐसे भी जो बैठे हैं
हसरतों को दिल में
दबाये हुए अभी तक
कब होगी
मुलाक़ात साहिल से
कब पायेंगे
निजात दिल के दर्द से
उन्हें पता नहीं
पर उनकी चाहत की
इन्तहां तो देखिये
होंसला नहीं खोते हैं
इंतज़ार में
हर खूबसूरत चेहरे को
देख कर मुस्काराते हैं
नित नए ख्वाब बुनते हैं
13-03-2012
359-93-03-12
मजबूरी
करना नहीं चाहता
फिर भी करना पड़ता
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अंतर्द्वंद्व
करूँ तो
मन खुश नहीं होगा
नहीं करूँ तो
दूसरों को नाराज़
करना होगा
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विडंबना
मैं उन्हें बहन
समझता
वो मुझे शक से
देखती
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खुश
मैं रोज़ सपनों में
उनको देख लेता हूँ
थोड़ी देर खुश हो
लेता हूँ
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दिल में
दिल में बहुतों के लिए
कुछ होता रहता है
मजबूरी में
इंसान खामोश
रहता है
*****
बदकिस्मती
उनका
इंतज़ार करते करते
सो गया
जब तक जागा
वो आकर चले गए
23-11-2011
1810-81-11-11