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Tuesday, June 5, 2012

नियत पर सवाल ना करो



पत्ता पत्ता बूटा बूटा
पहचानता मुझे
तितलियाँ भँवरे
सब जानते मुझे
फिजा तक
समझती मुझे
एक तुम ही हो
जो ना समझे
ना जाने मुझे
मुझे शक से देखते रहे
तोहमत लगाते रहे
खुद नफरत के
रास्ते पर चलते रहे
तंग दिली दिखाते रहे
अब मेरी भी
इल्तजा सुनलो
मुझ पर रहम करो
मेरी नियत पर
शक ना करो
गर नियत पर
शक,शुबहा करोगे
रोने लगेंगे चाँद
सितारे
सूख जायेंगे पत्ते बूटे
ग़ुम हो जायेंगे
तितलियाँ,भँवरे
फिर भी चाहो तो
मेरी जान ले लो 
पर नियत पर
सवाल ना करो
05-06-2012
564-14-06-12


Sunday, December 4, 2011

मेरा जूता एक दिन बोला मुझ से


मेरा जूता
एक दिन बोला मुझ से
कब तक घिसोगे मुझको
मेरी प्रार्थना सुन लो
मेरे कष्ट थोड़े कम कर दो
सहने के लिए एक
साथी दे दो
जूते की एक और जोड़ी
खरीद लो
चलते चलते थक गया हूँ
कीचड,गोबर में
सनते,सनते उकता गया हूँ
धूल,मिट्टी से भरता हूँ
उफ़ करे बिना
पथरीले सफ़र पर
चलता हूँ
सर्दी,गर्मी,बरसात में
निरंतर मुझे  घसीटते हो
कभी क्रोध दिखाने के लिए
नेताओं पर उछालते हो
कोई झगडा करे तो
निकाल कर मारते हो
मुझे खुश करने के लिए
थोड़ी सी पोलिश लगाते हो
बदबूदार
मोज़े सूंघते सूंघते
आत्म ह्त्या का मन
करता
मेरी छाती जैसा तला
गम में फट ना जाए
उससे पहले थोड़ा सा
रहम कर दो
जूते की एक और जोड़ी
खरीद लो
सहने के लिए एक
साथी दे दो
04-12-2011
1840-08-12

Tuesday, July 19, 2011

थोड़ा तो रहम कीजिए

निगाह-ऐ-करम चाहे
ना रखिए
रिश्ते सब भूल जाइए
मगर थोड़ा तो रहम
 कीजिए
हमसे नफरत तो
ना रखिए
निरंतर साथ साथ
हँसते गाते थे
 इतना तो ख्याल
कीजिए
यादों की दुनिया में
जाओगे
वहाँ भी हमें पाओगे
फिर क्या करोगे?
बिना हमारे
 कैसे काम चलाओगे ?
कम-स-कम इतना तो
सोचिए
19-07-2011
1204-84-07-11