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Saturday, September 1, 2012

अब फिर ज़ख्म खाने का मन करता



अब फिर ज़ख्म खाने का
मन करता
उनसे मिलने का दिल
करता
मिलेंगे तो हम पर तोहमत
लगायेंगे
हमें गुनाहगार करार देंगे
शहर भर में रुसवा करेंगे
हमें तो
आदत है ज़ख्म खाने की
चुपचाप दर्द सहने की
हमें गम नहीं होगा उनके
नफरत भरे अंदाज़ का
इस बहाने उन्हें देख तो लेंगे
कुछ अरसे
उनके ज़हन में तो रहेंगे
01-09-2012
707-03-09-12

Tuesday, June 5, 2012

नियत पर सवाल ना करो



पत्ता पत्ता बूटा बूटा
पहचानता मुझे
तितलियाँ भँवरे
सब जानते मुझे
फिजा तक
समझती मुझे
एक तुम ही हो
जो ना समझे
ना जाने मुझे
मुझे शक से देखते रहे
तोहमत लगाते रहे
खुद नफरत के
रास्ते पर चलते रहे
तंग दिली दिखाते रहे
अब मेरी भी
इल्तजा सुनलो
मुझ पर रहम करो
मेरी नियत पर
शक ना करो
गर नियत पर
शक,शुबहा करोगे
रोने लगेंगे चाँद
सितारे
सूख जायेंगे पत्ते बूटे
ग़ुम हो जायेंगे
तितलियाँ,भँवरे
फिर भी चाहो तो
मेरी जान ले लो 
पर नियत पर
सवाल ना करो
05-06-2012
564-14-06-12


Thursday, August 25, 2011

यूँ तोहमत ना लगाओ

मेरे क़दमों के
निशाँ देख लो
उनमें वफ़ा का
अक्स देख लो
मेरे क़दमों से
मिला लो
फर्क नज़र आ
जाए
तो गुनाहगार
करार दे दो
यूँ  तोहमत ना
लगाओ
अफवाहों को हवा
ना दो 
निरंतर बेवफा
ना कहो
25-08-2011
1393-115-08-11