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Sunday, March 3, 2013

गरीब बेचारा गरीब रह गया



आंकड़ों के
मकड़ जाल में सारा देश
उलझ गया
गरीब बेचारा गरीब रह गया
मुद्रास्फीति,महंगाई दर ,
रोज़ कितने पैसों में
गरीब का घर चलता
इस जोड़ बाकी में
गरीब बेचारा पिस गया
वातानुकूलित कमरों में बैठे
अर्थशास्त्रियों की ज़द्दोज़हद में
गरीब बेचारा उलझ गया
उसे क्या लेना देना
क्या बड़ा क्या घटा
अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में
थक चुका आंकड़ों के जाल से
उसके तो पेट की भूख
मिटनी चाहिए
पीने को स्वच्छ पानी
सर पर छत होनी चाहिए
बच्चों को शिक्षा,स्वस्थ शरीर
क़ानून का राज़ चाहिए
दर बड़े या घटे
नेता झूठ बोले या सच
उसे कोई मतलब नहीं
उसे तो बस आराम की
नींद आनी चाहिए
07-07-03-01-2013
देश,सरकार,राज,गरीब,जनता
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

Saturday, December 10, 2011

अब और देरी मत करो


अब और देरी मत करो
समय व्यर्थ ना करो
देश को शर्मिन्दा ना करो
घडियाली आंसू बंद करो
अन्याय करना बंद करो
अपनों को पराया ना कहो
जनता की इच्छा जान लो
जनता की बात मान लो
नाटक करना छोड़ दो
भ्रष्ट तंत्र को ख़त्म करो
गाँधी अन्ना का सम्मान करो
जन लोकपाल क़ानून
पास करो
10-12-2011
1849-17-12

Friday, November 25, 2011

धूल के कण से कण मिला


धूल के
कण से कण मिला
मिलकर गुबार बना
तेज़ हवाओं ने उसे
बवंडर बना दिया
धूल का कण
अहम् अहंकार से
भर गया
अपने को शक्तिशाली
समझने लगा
संसार को अपने
अधीन करने की इच्छा में   
वीभत्स रूप दिखाने लगा
जो भी सामने आया
उसे ढक दिया
अपने रंग में रंग दिया
इंद्र ने आकाश से देखा
धूल का मंतव्य समझ गया
घमंड को तोड़ने
वर्षा को भेज दिया
वर्षा ने भी रूप अपना
दिखाया
शीतल जल  से
बवंडर को ठंडा किया
उसके घमंड को
शांती से दबा,धूल को
पानी में बहा दिया
दुनिया को दिखा दिया
अहम् अहंकार का
स्थान नहीं दुनिया में  
ठंडक से
अग्नि भी कांपती
शांती निरंतर
विनाश से बचाती
(धूल से मेरा अभिप्राय ,निकम्मे,भ्रष्ट 
एवं निम्न स्तर और सोच वाले
व्यक्तियों से है ,
जो येन केन प्रकारेण,
राजनीती की सीढियां चढ़ कर,
सत्ता के गलियारों में पहुँचते हैं
और सब कुछ अपने 
अधीन करने का प्रयास करते हैं,
वर्षा के ठन्डे पानी से अभिप्राय,
सब्र से जीने वाली  जनता से है ,
प्रजातंत्र में ,जनता उन्हें ठन्डे तरीके से
चुनाव के समर में  उखाड़ फैंकती है)

                                   25-11-2011
                                      1820-85-11-11

Sunday, August 28, 2011

आज का नेता बिन पैंदे का लोटा

पैंदे का लोटा
मुंह पर मुस्कान अन्दर
शैतान
क्या दिल में है कोई
ना जाने
सफ़ेद कपड़ों में भ्रम
फैलाएं 
जनता को बातों से
लुभाए
रोज़ एक नया सपना  
दिखाए
गरीब को और गरीब
बनाए
धर्म ईमान हैं दुश्मन 
इनके
विश्वाश घात है ताकत
इनकी
देश के माल जेब में 
करना खूबी इनकी
चमड़ी इनकी सख्त
और मोटी
किसी बात का कोई
असर नहीं
जूते निरंतर खाते जाते
फिर भी मुस्कराते जाते
आज कहा कल भूल जाते
गिरगिट से ज्यादा
रंग बदलते
इन्हें देख गिरगिट
शरमाते
डाकू लज्जा से सर
झुकाते
इनसे बड़े घाघ नहीं होते
अभिनय में
अमिताभ को हराते  
बस चले तो भगवान्
को ना छोड़े
ऐसे नेता से बच कर
रहना
ज़ल्द से ज़ल्द पीछा
        छुडाना       
28-08-2011
1408-130-08-11

Sunday, July 17, 2011

जब मुंसिफ ही कातिल हो गए,फैसला क्या ख़ाक करेंगे


आवाम का माल
जब जेब में रखेंगे
चोरों को
क्या ख़ाक पकड़ेंगे  
वोट के खातिर
मजहब की सियासत
करेंगे
आवाम का ख्याल
क्या ख़ाक रखेंगे
निरंतर गद्दारों को
जब माफ़ करेंगे
मुल्क का ख्याल
क्या ख़ाक रखेंगे
कातिल हो गए
फैसला
क्या ख़ाक करेंगे
गुनाहगार बाहर होंगे
बेगुनाह सज़ा पाते
रहेंगे
17-07-2011
1196-76-07-11
(मुंसिफ=फैसला करने वाला,सियासत =राजनीति ,आवाम =जनता)

Wednesday, June 29, 2011

पार्टियां बदलती, चेहरे बदलते ,सरकार वैसी ही रहती

चुनाव के नाम पर
चेहरे पर मुस्कान आती
पांच साल बाद राहत
मिलेगी
जनता को आशा की
नयी किरण दिखती
वादे वही होते
पार्टियां बदलती
चेहरे बदलते
सरकार वैसी ही रहती
जनता की हालत
बद से बदतर होती
समस्याएं बढ़ती रहती
जनता ठगी सी महसूस
करती
निरंतर आंसू बहाती
रहती
कब पांच साल बीतेंगे
सरकार बदलेगी
उम्मीद में जीते
रहते 
29-06-2011
1112-139-06-11

Sunday, June 12, 2011

हकीकत कब तक छुपाओगे,जनता के दरबार में इक दिन तो आओगे

झूठ पर झूठ बोल रहे हो
नफरत के बीज बो रहे हो
भोले भाले लोगों को
निरंतर बरगला रहे हो
देश को इतना लूटा तुमने
फिर भी बाज़ नहीं आ रहे हो
चोरों को बचा रहे हो
अन्ना,रामदेव को गाली देने वालों
कब तक बचोगे,बचाओगे
हकीकत कब तक छुपाओगे
जनता के दरबार में
इक दिन तो आओगे
जितना मुस्करा रहे हो
उस से ज्यादा रोओगे
इक दिन तो पर्दाफ़ाश होगा
दूध का दूध पानी का पानी होगा
एक एक पाई का हिसाब देना होगा
बहुत को जेल में जाना होगा
देश भक्तों के चोले में
छुपे भेडीयों का चेहरा आम होगा
जनता के कोप को सहना होगा
कर्मों की सज़ा को भुगतना होगा
12-06-2011
1038-65-06-11