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Wednesday, March 20, 2013

कुछ पल के लिए ही सही



ह्रदय की हलचल
मन की खुशी
जीवन की व्यथा
मैंने सांझा करी तुमसे
मैं नहीं कहता
तुम भी सांझा करो
अपने ह्रदय की हलचल
मन की खुशी
पर जीवन की व्यथा तो
सांझा कर लो मुझसे
सुलझा तो नहीं पाऊंगा
पर दिलासा तो दे पाऊंगा
कुछ पल के लिए ही सही
तुम्हारे मन को
चैन तो दे पाऊंगा
38-38-19-01-2013
चैन,हलचल,दिलासा,सांझा करना,व्यथा ,जीवन   
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

Wednesday, May 30, 2012

जिसे भी मनायें हम मनायें

जिसे भी मनायें हम मनायें
हमारे दुःख ना जाना कोई
किसे कहें तकलीफ हमारी
हमें सुनने वाला नहीं कोई
हमें तो आदत है सहने की
क्यों हमें दिलासा दे कोई
ना पहले दुआ का असर हुआ
ना अब आगे उम्मीद कोई
अब मुस्काराते हुए जीना है
अब और चारा भी नहीं कोई
30-05-2012
544-64-05-12

Tuesday, December 27, 2011

कुछ फूल मेरे बगीचे में भी खिल जाए


कुछ फूल
मेरे बगीचे में भी
खिल जाए
काटों के बीच कुछ
महक भी  मिल जाए
ना जाने क्यूं
हर पेड़ सूख जाता
मेरे हाथों में
लाख कोशिश करूँ
जिलाने की
 कामयाबी फिर भी
 हाथ ना आए
उमीदें भी थक गयी
दिलासा देते देते
कुछ तो ऐसा हो जाए
चेहरे पर फिर से
मुस्कान आ जाए
कुछ फूल
मेरे बगीचे में भी
खिल जाए
27-12-2011
1897-65-12

Sunday, December 11, 2011

बड़ी शिद्दत से दर्द-ऐ-दिल सुनते हैं लोग



बड़ी शिद्दत से
दर्द-ऐ-दिल सुनते हैं
लोग
दिलासा भी देते हैं
लोग
हाथ पकड़ते हैं
पर थाम कर रखते
नहीं लोग
निरंतर रिश्ते बनाते
फिर भूलते हैं लोग
ना जाने क्यूं  साथ
निभाते नहीं लोग
या तो कुछ खता
होती होगी हम से
या फिर ज़माने का
दस्तूर निभाते हैं
लोग
11-12-2011
1852-20-12

Sunday, November 6, 2011

सुकून चाहा,मिल ना सका



सुकून चाहा 
मिल ना सका
जितना खोजा उतना
उलझता गया
कईओं से सहारा माँगा
दिलासा सब ने दिया
कंधा किसी से ना मिला
हर इंसान को खुद में
डूबा पाया
क़त्ल नहीं किया 
फिर भी सबको मुझ में
कातिल नज़र आया
निरंतर
कोशिशों के बाद भी
रास्ता ना निकल पाया
खुद को चौराहे पर
खडा पाया
06-11-2011
1749-18-11-11

Friday, July 29, 2011

उम्मीदों का दामन तार तार हो गया

उम्मीदों का दामन

तार तार हो गया

नाकामयाबी के छेदों से

भर गया

अब क्या रफू करेगा कोई ?

क्या दिलासा देगा कोई ?

कोई मिल भी जाए

क्या साथ निभाएगा कोई ?

यादों की चादर ओढ़े हूँ

उम्मीदें उस में

छुपा कर रखता हूँ

एक पैबंद लग भी जाए

दामन ठीक हो नहीं

सकता

अब उम्मीद करना

छोड़ दिया

क्यों उम्मीदें बर्बाद करूँ ?

अब चुपचाप रहता हूँ

निरंतर खून के घूँट

पीता हूँ

29-07-2011

1261-145 -07-11